करवा चौथ पूजा:- 100 साल बाद बन रहा है ऐसा महासंयोग!! जानिए पूजा की उत्तम विधि, शुभ मुहूर्त और अपयश!!

करवाचौथ सुहागिनों का सबसे बड़ा त्योहार होता है… 

आइए सबसे पहले आपको बताते हैं कि कौन से योग इस करवाचौथ को दिव्य और चमत्कारी बना रहे हैं… 100 साल बाद करवाचौथ का महासंयोग:-  

करवा चौथ का त्यौहार इस बार बुधवार को मनाया जा रहा है। बुधवार को शुभ कार्तिक मास का रोहिणी नक्षत्र है। इस दिन चन्द्रमा अपने रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे। इस दिन बुध अपनी कन्या राशि में रहेंगे। इसी दिन गणेश चतुर्थी और कृष्ण जी की रोहिणी नक्षत्र भी है। बुधवार गणेश जी और कृष्ण जी दोनों का दिन है। ये अद्भुत संयोग करवाचौथ के व्रत को और भी शुभ फलदायी बना रहा है। इस दिन पति की लंबी उम्र के साथ संतान सुख भी मिल सकता है।

करवा चौथ पर महिलाएं अपने पति के लिए व्रत रखती हैं और इस दिन वह पूरे सोलह श्रृंगार करके पूजा करती है। पूजा के लिए मंदिर की सफाई करना, कलश सजाना और पूजा की थाली इस दिन के महत्व को और भी बढ़ा देते हैं। पूजा की इस थाली को ‘बाया’ भी कहते हैं, जिसमें सिन्दूर, रोली, जल और सूखे मेवे रहते हैं। थाली पर मिट्टी के दीये के साथ ही पूजा की और भी जरूरी चीजें रखी जाती हैं।

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जानिए करवाचौथ क्यों है इतना खास:- 

कहते हैं जब पांडव वन-वन भटक रहे थे तो भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी को इस दिव्य व्रत के बारे बताया था। इसी व्रत के प्रताप से द्रौपदी ने अपने सुहाग की लंबी उम्र का वरदान पाया था। आइए जानें, इस दिन किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है और इस व्रत से कौन-कौन से वरदान पाए जा सकते हैं…।

करवाचौथ के दिन श्री गणेश, मां गौरी और चंद्रमा की पूजा की जाती है। चंद्रमा पूजन से महिलाओं को पति की लंबी उम्र और दांपत्य सुख का वरदान मिलता है। विधि-विधान से ये पर्व मनाने से महिलाओं का सौंदर्य भी बढ़ता है। करवाचौथ की रात सौभाग्य प्राप्ति के प्रयोग का फल निश्चित ही मिलता है।

अगले पेज पर पढ़ें व्रत के नियम और सावधानियां.. 

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