150 सालों से इस मंदिर की रक्षा कर रहा है एक चमत्कारी शाकाहारी मगरमछ!! जानिए इस मंदिर के बारे में!

बाबिया” नाम से जानते है सभी:- मगरमच्छ आया कब!! 

यह मगरमच्छ कहां से आया, इस झील में कब आया, यह कोई नहीं जानता। लेकिन लोगों का कहना है कि नौवीं शताब्दी में मंदिर के निर्माण के बाद ही, यहां झील में अचानक एक मगरमच्छ आ गया। लोगों का कहना है कि तब से लेकर अब तक इस झील में कई मगरमच्छ मरे भी, लेकिन अचंभा तब होता है जब एक मगरमच्छ मरने के बाद अपने आप ही दूसरा मगरमच्छ झील में आ जाता है।

“बबिया” नामक यह मगरमच्छ कोच्चि जिले के अनंतपुरा मंदिर की झील में रहता है! मंदिर के लोग बताते हैं कि बाबिया यहां काफी वर्षों से रह रहा है! उसका निवास झील और पास ही बनी गुफाएं हैं! 

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ऐसा माना जाता है कि यह सम्मानित प्राणी “बाबिया” मंदिर का रक्षक है! ऐसा भी कहा जाता है कि जब मगर की मृत्यु होती है तो आश्चर्यजनक रहस्यमयी रूप से कोई दूसरा मगरमच्छ उसका स्थान ले लेता है! 

अनंतपुरा मंदिर केरल में केवल एक ही झील या तालाब वाला मंदिर है! लोक कथाओं के अनुसार इस स्थान को अनंत पद्मनाभ स्वामी का मूल आसन या मूल स्थान माना जाता है! यह मंदिर बेकल से 30 किमी दूर स्थित है! इस मंदिर की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि जाति, जातीयता और धर्म की परवाह किए बिना यहाँ कोई भी जा सकता है!

अगले पेज पर पढ़ें मगरमच्छ और इस अद्भुत मंदिर के बारे में… 

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