देसी, अंग्रेजी शराब को टक्कर दे रही है ये आयुर्वेदिक शराब! होने लगा इसका बोल बाला! जानिए इसके बारे में!!

अभी तक 200 शराबी इसे अपना कर शराब छोड़ चुके है।

शराब पीने के शौकीन लोग शराब नहीं छोड़ सकते इसलिए उनकी इस मानसिकता को ध्यान में रखते हुए इस देशी आयुर्वेदिक शराब को दारू, गांजा और अफीम नाम दिया गया है। इससे नशाखोरों को नशा का अहसास होगा। इस विकल्प द्वारा नशामुक्त कराना उनका ध्येय है। इसे तैयार करने का तरीका भी यहां सिखाया जाता है। अभी तक 200 शराबी इसे अपना कर शराब छोड़ चुके है।

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इस शिक्षक ने केवल आयुर्वेदिक शराब ही नहीं बल्कि तम्बाकू और गुटका छुड़ाने के लिए अरुसी, नीम, कत्था, तेजपत्ता और तुलसी से आयुर्वेदिक गुटखा भी तैयार किया है। वहीं जेठीमध, अरुसी और बरियाली तथा तेजपत्ता से आयुर्वेदिक बीड़ी भी तैयार की है। इसी प्रकार मुलेठी और हिमज से विशेष प्रकार की छिंकनी तैयार की है। राज्य में बढ़ रही नशाखोरी को रोकने के लिए चावड़ा ने हिमज, करियात पानी और पीपर मूल और चीनी से आयुर्वेदिक अफीम भी बनाई है। नाथूभाई चावड़ा गत दो वर्षों से यहां नशाबंदी अभियान चला रहे है।

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Source: Naidunia.jagran.com

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