सोमवार स्पेशल:- शिव की इस वंदना को सुनने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती हैं | शिव चालीसा हिंदी अर्थ सहित

भगवान शिव सोमवार स्पेशल भजन – भगवान शिव की इस वंदना को सुनने से सभी दुख और कलेशों से मुक्ति मिलती हैं, और घर में शांति बनी रहती है!

Shiv Chalisa in Hindi | Shiva Chalisa Lyrics in Hindi

॥ दोहा ॥

श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

( जय हो गणेश जी की जो गिरीजा के गाने जैसे हैं ।
और जो सब अच्छाई के मूल हैं ॥ )

जय गिरिजा पति दीन दयाला।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥

( जय हो गिरीजा के पति भगवान शिव की जो हमेशा ही अपने पीड़ित भक्तों पे कृपा करते हैं ।
और हमेशा ही संतो को अपना आशीर्वाद देते हैं ॥ )

भाल चन्द्रमा सोहत नीके।
कानन कुण्डल नागफनी के॥

( आप चन्द्रमा को अपने सर पर पहनते हैं ।
और एक साँप का सर आपके लिए कान की बाली की तरह है ॥ )

अंग गौर शिर गंग बहाये।
मुण्डमाल तन छार लगाये॥

( आपकी त्वचा गोरे रंग की है और गंगा नदी का मूल आपके सिर से होता है ।
आप कपालों से बनी माला पहनते हैं और आपका शरीर राख से लिप्त है ॥ )

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे।
छवि को देख नाग मुनि मोहे॥

( एक शेर की खाल आपका वस्त्र है ।
और आपको देखते ही सारे नाग मुनि ख़ुशी से पिघल जाते हैं ॥ )

मैना मातु की ह्वै दुलारी।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

( माता मैना की दुलारी बेटी ।
आपके बगल में बैठते हुए आपकी छवि को अत्यधिक सुन्दरता से भर देतीं हैं ॥ )

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

( हाथ में त्रिशूल पकड़कर और शेर की खाल पहन कर ।
आप हमेशा ही अपने शत्रुओं का नाश करते हैं ॥ )

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे।
सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

( आप हमेशा ही नंदी और भगवान गणेश का साथ देते हैं ।
और आप सागर के बीच में खिलते हुए कमल की तरह हैं ॥ )

कार्तिक श्याम और गणराऊ।
या छवि को कहि जात न काऊ॥

( सांवले रंग के भगवान कार्तिक और भगवन गणेश हमेशा आपके साथ होते हैं ।
और इस छवि का वर्णन करना असंभव है ॥ )

देवन जबहीं जाय पुकारा।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥

( जब भी देवताओं ने आपका नाम पुकारते हुए सफलता की इच्छा की है ।
तब तब अपने उनको उनके सारे दुखों से मुक्त किया है ॥ )

किया उपद्रव तारक भारी।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

( जब राक्षस तारकासुर ने देवताओं पर अपनी सारी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए उनपे वॉर किया ।
तब सारे देवता मिल कर आपकी मदद मांगने आये ॥ )

तुरत षडानन आप पठायउ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥

( तुरंत अपने उन्हें छे मुखों वाले भगवन के पास भेजा ।
जिन्होंने बिना किसी विलम्ब के तारकासुर का वध किया ॥ )

आप जलंधर असुर संहारा।
सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

( जलंधर नाम के राक्षस को भी आप ही ने मारा ।
और इस वजह से आपको दुनिया के हर कोने में जाना जाता है ॥ )

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥

( आपने त्रिपुरासुर से भी युद्ध किया ।
और कृपा दिखाते हुए सारे देवताओं को उसके आक्रमण से मुक्ति दिलवाई ॥ )

किया तपहिं भागीरथ भारी।
पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥

( राजा भगीरथ ने काफी तपस्या की ।
और इसी वजह से उसकी प्रतिज्ञाओं को पूरा करने में आपने उसकी मदद की ॥ )

दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं।
सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

( इस दुनिया में कोई भी आप जितना दानशील नहीं है ।
और आपके भक्त हमेशा ही अपने मन में आपको याद करते हैं ॥ )

वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

( महान वेदों ने भी आपकी महिमा की वर्णन करने की कोशिश की हैं ।
लेकिन, हे अनंत भगवन, वो भी आपके सार का वर्णन करने में असफल हो गए ॥ )

प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला।
जरे सुरासुर भये विहाला॥

( सागर के मंथन से ऐसे ज्वाल का जन्म हुआ ।
जो विष से बना था और जिससे देवता और असुर दोनों ही भयभीत थे ॥ )

कीन्ह दया तहँ करी सहाई।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

( और तब, अपने सब पर करुणा दिखाते हुए उस विष को निगल लिया और तब से आपका कण्ठ नीले रंग का हो गया ।
और तभी से आपको नीलकण्ठ बुलाते हैं ॥ )

पूजन रामचंद्र जब कीन्हा।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

( जब भगवन राम ने आपकी पूजा की ।
वो लंका जीत गए और उसको रावण के भाई विभीषण को सौंप दिया ॥ )

सहस कमल में हो रहे धारी।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

( वो (भगवन राम) आपको एक हज़ार कमल समर्पित करना चाहते थे ।
और तभी अपने उनकी भक्ति का परीक्षा करने का निर्णय किया ॥ )

एक कमल प्रभु राखेउ जोई।
कमल नयन पूजन चहं सोई॥

( उन हज़ार कमलों में से एक कमल को अपने गायब कर दिया ।
और उसको ढूंढने में असफल रहे भगवन राम ने उसकी जगह अपनी एक आँख को आपको समर्पित किया ॥ )

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।
भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

( उनकी ये महँ भक्ति देख कर, हे प्रभु शंकर ।
आप काफी प्रसन्न हुए और भगवान राम की सारी इच्छाओं को अपने पूरा किया ॥ )

जय जय जय अनंत अविनाशी।
करत कृपा सब के घटवासी॥

( जय जय जय हो आपकी, हे अनंत और अविनाशी भगवन ।
आप जो ब्रह्माण्ड के हर कोने में हैं, हम सब पे कृपा करें ॥ )

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥

( बुरे विचार मुझे रोज़ सताते हैं ।
इससे मैं पीड़ित हूँ और मुझे शांति नहीं प्राप्त है ॥ )

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।
यहि अवसर मोहि आन उबारो॥

( मदद करें मेरी, मैं आपका नाम पुकारता हूँ भगवन ।
इसी क्षण में मैं आपके आशीर्वाद की भीख मांगता हूँ ॥ )

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।
संकट से मोहि आन उबारो॥

( अपने त्रिशूल से आप मेरे सारे शत्रुओं का नाश करें ।
और मुझे हर तरह के मुसीबत से मुक्ति दें ॥ )

मातु पिता भ्राता सब कोई।
संकट में पूछत नहिं कोई॥

( मेरे माता-पिता, भाई और मेरे सारे रिश्तेदार ।
मुश्किल के समय मुझे कोई भी बचा नहीं पायेगा ॥ )

स्वामी एक है आस तुम्हारी।
आय हरहु अब संकट भारी॥

( सिर्फ आप ही हैं जो मेरी रक्षा कर सकते हैं ।
कृपया आकर मेरी सारी मुश्किलें दूर करें ॥ )

धन निर्धन को देत सदाहीं।
जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥

( आप हमेशा ही गरीब को धन का वरदान देते हैं ।
जो भी आपके नाम का जाप करता है उसको मन चाहा फल मिलता है ॥ )

अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

( मैं आपको कैसे याद करूँ और कैसे आपकी पूजा करूँ, हे भगवन ।
मेरी सीमित बुद्धि और क्षमता के लिए मुझे क्षमा करें, भोलेनाथ ॥ )

शंकर हो संकट के नाशन।
मंगल कारण विघ्न विनाशन॥

( आप शंकर हैं दुःखों के नाशक ।
सकारात्मक चीज़ों के संभाजक और बाधाओं के नाशक ॥ )

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।
नारद शारद शीश नवावैं॥

( ऋषि, मुनि और संत सभी आप पे ध्यान करते हैं ।
यहाँ तक कि नारद मुनि और देवी सरस्वती भी आपके सामने शीश झुकाते हैं ॥ )

नमो नमो जय नमो शिवाय।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

( मैं आपको सलाम करता हूँ, जय हो आपकी हे शिवाय ।
भगवन ब्रह्मा और सारे देवता भी आपके व्यक्तित्व का वर्णन नहीं कर सकते हैं ॥ )

जो यह पाठ करे मन लाई।
ता पर होत है शम्भु सहाई॥

( जो कोई भी इस प्रार्थना को अपने मन में गायेगा ।
वो निश्चित रूप से भगवान शम्भू की सहायता पायेगा ॥ )

ॠनिया जो कोई हो अधिकारी।
पाठ करे सो पावन हारी॥

( जो भी इस प्रार्थना को गहन प्रेम से गायेगा ।
वो भगवन शिव को समर्पित किये गए इस गाने के दुहराव से सारे सुख और संपत्ति पायेगा ॥ )

पुत्र हीन कर इच्छा कोई।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

( जब भी कोई निस्संतान व्यक्ति संतान की खातिर प्रार्थना करता है ।
भगवान शिव उसे निसंदेह संतान पाने का वरदान देते हैं ॥ )

पण्डित त्रयोदशी को लावे।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

( जो भी त्रयोदशी के दिन एक पंडित को नियुक्त कर कर ।
शुद्ध मन से यग्न करता है ॥ )

त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा।
तन नहीं ताके रहे कलेशा॥

( और जो भी हमेशा त्रयोदशी के दिन व्रत रखता है ।
उसका शरीर हर बीमारी से सुरक्षित रहेगा और उसका मन हमेशा के लिए शांतिपूर्ण होगा ॥ )

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥

( जो भी भगवान शिव की पूजा दिए और धूप के साथ करेगा ।
और भगवन शिव के सुन्दर चेहरे के सामने ये प्रार्थना बार बार दोहोरायेगा ॥ )

जन्म जन्म के पाप नसावे।
अन्तवास शिवपुर में पावे॥

( उसके हर जन्म के पाप नष्ट हो जायेंगे ।
और उसे उसके जीवनकाल के अंत में भगवान शिव के नगर में शरण प्राप्त होगी ॥ )

कहे अयोध्या आस तुम्हारी।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

( अयोध्या प्रसाद, आपसे बिनती करता है, हे भगवन ।
की आप हम सब को लंबे जीवन का आशीर्वाद दें और हमारी सारी दुखों को हर लें ॥ )

॥ दोहा ॥
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीस।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥

( दिन के सभी कर्तव्यों को पूरा करने के बाद, मैं इस चालीस पद्य की कविता गाता हूं ।
कृपया मेरी साड़ी मनो कामनाओं को ध्यान में रखें, और उन्हें पूरा करें, हे भगवान् जगदीश ॥
शिव चालीसा गाके धयान करने से, पूर्ण पूर्ती प्राप्त होती है ।
कृपया मुझे आशीर्वाद दें, हे भगवान् शिव, ताकि मेरी सभी आध्यात्मिक और भौतिक इच्छाएं पूरी हो जाएं ॥ )

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