ऐसा शिवलिंग जो हर 12 साल में बिजली गिरने पर हो जाता है खंडित!! “जुड़ जाता है स्वयं”

यहां रहता था कुलान्त राक्षस जो रूप बदलने में माहिर था…

यह जगह समुद्र स्तर 2450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। शीत काल में यहां भारी बर्फबारी होती है। कुल्लू में भी महादेव प्रिय देवता हैं। कहीं वे सयाली महादेव हैं तो कहीं ब्राणी महादेव। कहीं वे जुवाणी महादेव हैं तो कहीं बिजली महादेव। बिजली महादेव का अपना ही महात्म्य व इतिहास है। ऐसा लगता है कि बिजली महादेव के इर्द-गिर्द समूचा कुल्लू का इतिहास घूमता है। हर मौसम में दूर-दूर से लोग बिजली महादेव के दर्शन करने आते हैं।

ऐसी मान्यता है कि प्राचीन समय में यहां एक विशाल अजगर रहता था। जगत के कल्याण के लिए भगवान शिव ने उसका वध किया था। असल में वह एक दैत्य था। उसका नाम कुलांत था। वह रूप बदलने में माहिर था और अजगर का रूप भी धारण कर सकता था। कुल्लू घाटी के लोग बताते हैं कि बहुत पहले यहां कुलान्त नामक दैत्य रहता था। दैत्य कुल्लू के पास की नागणधार से अजगर का रूप धारण कर मंडी की घोग्घरधार से होता हुआ लाहौल स्पीति से मथाण गांव आ गया। दैत्य रूपी अजगर कुण्डली मार कर ब्यास नदी के प्रवाह को रोक कर इस जगह को पानी में डुबोना चाहता था। इसके पीछे उसका उद्देश्य यह था कि यहां रहने वाले सभी जीवजंतु पानी में डूब कर मर जाएंगे। भगवान शिव कुलान्त के इस विचार से से चिंतित हो गए।

अगले पेज पर पढ़ें अजगर के कान में धीरे से बोले भगवान शिव…

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