जानिए क्यों मनाते हैं छठ पूजा? धार्मिक महत्व, मुहूर्त समय, भूल से भी न करें ये 6 गलतियां!

छठ 2017: 34 साल बाद बन रहा है महासंयोग, जानें कितना होगा शुभ….

पहले दिन मंगलवार की गणेश चतुर्थी है। गणेश जी हर काम मंगल ही मंगल करेंगे। पहले दिन सूर्य का रवियोग भी है। ऐसा महासंयोग 34 साल बाद बन रहा है। रवियोग में छठ की विधि विधान शुरू करने से सूर्य हर कठिन मनोकामना भी पूरी करते हैं। चाहे कुंडली में कितनी भी बुरी दशा चल रही हो, चाहे शनि राहु कितना भी भारी क्यों ना हों, सूर्य के पूजन से सभी परेशानियों का नाश हो जाएगा। ऐसे महासंयोग में यदि सूर्य को अर्घ्य देने के साथ हवन किया जाए तो आयु बढ़ती है।

“चार द‍िन मनाया जाता महापर्व”

पहले दिन नहाय- खाय में क्या करते है… 

सुबह नदी या तालाब कुआं या चापा कल में नहा कर शुद्ध साफ वस्त्र पहनते हैं। छठ करने वाली व्रती महिला या पुरुष चने की दाल और लौकी शुद्ध घी में सब्जी बनाती है। उसमें सेंधा शुद्ध नमक ही डालते है। बासमती शुद्ध अरवा चावल बनाते हैं। गणेश जी और सूर्य को भोग लगाकर व्रती सेवन करती है। घर के सभी सदस्य भी यही खाते हैं। घर के सदस्य को मांस मदिरा का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। रात को भी घर के सदस्य पूड़ी सब्जी खाकर सो जाते है।

दूसरे दिन पंचमी को दिनभर निर्जला उपवास और शाम को सूर्यास्‍त के बाद ही भोजन ग्रहण क‍िया जाता है।

तीसरे दिन षष्ठी पर डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के अलावा और छठ का प्रसाद बनता है।

चौथे दिन सप्तमी की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्‍य देने के साथ उपवास खोला जाता है।

अगले पेज पर पढ़ें भूलकर भी न करें छठ पूजा में ये 6 गलतियां…

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