धनतेरस 2021:- जानिये शुभ मुहूर्त, संपूर्ण पूजा विधि और महत्व! धन्वं‍तरि कौन थे??

DhanTeras 2021 : धन्वं‍तरि कौन थे जिनकी होती है धनतेरस पर पूजा

धन तेरस पर भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा होती है। उन्हें आयुर्वेद का जन्मदाता और देवताओं का चिकित्सक माना जाता है। भगवान विष्णु के 24 अवतारों में 12वां अवतार धन्वंतरि का था।

धन्वंतरि के जन्म के संबंध में पौराणिक कथा:-

समुद्र मन्थन से उत्पन्न धन्वंतरि प्रथम : कहते हैं कि भगवान धन्वंतरि की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुए थी। वे समुद्र में से अमृत का कलश लेकर निकले थे जिसके लिए देवों और असुरों में संग्राम हुआ था। समुद्र मंथन की कथा श्रीमद्भागवत पुराण, महाभारत, विष्णु पुराण, अग्नि पुराण आदि पुराणों में मिलती है।

दिवाली से पहले कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस (Dhanteras 2021) का पर्व मनाया जाता है. इस दिन को धन त्रयोदशी या धनवंतरि जयंती भी कहा जाता है. धनतेरस पर मां लक्ष्मी, भगवान धनवन्तरी और धन कुबेर की उपासना करने से घर में धन के भंडार कभी खाली नहीं होते हैं. धनतेरस इस साल 02 नबंवर 2021 दिन मंगलवार को है. इस त्योहार को धन और समृद्धि का कारक माना जाता है.

धनतेरस पर्व तिथि व मुहूर्त 2021

धनतेरस तिथि – मंगलवार, 2 नवंबर 2021

धनतेरस पूजन मुर्हुत – शाम 06:18 बजे से रात 08:10 बजे तक

प्रदोष काल – शाम 05:32 से रात 08:10 बजे तक

वृषभ काल –  शाम 06:18 से रात 08:13 बजे तक

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ – सुबह 11:31 बजे (2 नवंबर 2021) से

त्रयोदशी तिथि समाप्त – सुबह 09:02 बजे (3 नवंबर 2021)  तक

धनतेरस पूजा विधि

संध्याकाल में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है ।  पूजा के स्थान पर उत्तर दिशा की तरफ भगवान कुबेर और धन्वन्तरि की मूर्ति स्थापना कर उनकी पूजा करनी चाहिए । इनके साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की पूजा का विधान है । ऐसी मान्‍यता है कि भगवान कुबेर को सफेद मिठाई, जबकि धनवंतरि‍ को पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए । क्योंकि धन्वन्तरि को पीली वस्तु अधिक प्रिय है । पूजा में फूल, फल, चावल, रोली, चंदन, धूप व दीप का इस्तेमाल करना फलदायक होता है । धनतेरस के अवसर पर यमदेव के नाम से एक दीपक निकालने की भी प्रथा है| दीप जलाकर श्रद्धाभाव से यमराज को नमन करना चाहिए।

धनतेरस पर क्यों खरीदे जाते हैं बर्तन

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुंद्र मंथन से धन्वन्तरि प्रकट हुए । धन्वन्तरी जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था । भगवान धन्वन्तरी कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है । विशेषकर पीतल और चाँदी के बर्तन खरीदना चाहिए,  क्योंकि पीतल महर्षि धन्वंतरी का धातु है । इससे घर में आरोग्य, सौभाग्य और स्वास्थ्य लाभ होता है । धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर और यमदेव की पूजा अर्चना का विशेष महत्त्व है। इस दिन को धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है।

क्यों होती है महालक्ष्मी की पूजा-

कहते हैं कि धनतेरस के दिन धन्वंतरि देव और मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में कभी धन की कमी नहीं रहती है। इस दिन भगवान कुबेर की पूजा की भी विधान है। 


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