इस नवरात्रि ऐसे करें पूजा बरसेगी माता की कृपा- जानिए क्या है शुभ मुहूर्त, माता के 9 रूप, भोग और 9 रंग!

पहले नवरात्रे वाले दिन मां के रूप शैलपुत्री का पूजन किया जाता है।

इसी दिन कलश स्थापना होती है। कलश पर स्वास्तिक बनाया जाता है। हिंदू घर्म में इसकी बहुत मान्यता है, इसके बाद कलश पर मौली बांध कर उसमें जल भरकर उसे नौ दिन के लिए स्थापित कर दिया जाता है। कुछ लोग नवरात्रों के अष्टमी के दिन कन्या पूजन करते हैं और कुछ लोग नवमी के दिन पूजन किया जाता है। कन्या पूजन के बिना नवरात्रों का फल नहीं मिलता है। आप चाहे उपवास ना करें लेकिन नवरात्र के दौरान कन्या पूजन सबसे महत्वपूर्ण है। छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का रूप माना जाता है।

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नवरात्रि में देवी को हर दिन एक विशेष प्रकार का भोग लगाया जाता है। नवरात्रि में पहले दिन से लेकर अंतिम दिन तक देवी को ये विशेष भोग अर्पित करने और बाद में इसे गरीबों में दान करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती है। आईए जानते हैं कि शारदीय नवरात्र के मौके पर किस दिन मां को कौन सा भोग लगाने की परंपरा है जिससे व्यक्ति के जीवन में दुख का नाश होकर सुख-शांति और खुशहाली का प्रवेश होता है।

अगले पेज पर पढ़िए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त…..

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