Sri Krishna Janmashtami 2019- कृष्ण जन्माष्टमी पर कैसे प्रसन्न करें भगवान श्री कृष्ण को! जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि?

5246th Birth Anniversary of Sri Bhagvan Krishna!! जन्‍माष्‍टमी पर इस बार कई सालों के बाद बेहद पावन संयोग… 

हम सभी जानते है कि श्री कृष्णजन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जनमोत्स्व है। पवित्र माह सावन के समाप्त होते ही भाद्रपद (भादो) महीना शुरू होता है। इसी महीने के शुरू होते ही अष्टमी के दिन यह पर्व पूरे देश भर में हर्षो उल्लास के साथ मनाया जाता है। योगेश्वर कृष्ण के भगवद गीता के उपदेश अनादि काल से जनमानस के लिए जीवन दर्शन प्रस्तुत करते रहे हैं। जन्माष्टमी भारत में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी इसे पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं।

श्रीकृष्ण ने अपना अवतार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अत: इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इसीलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठती है।

Shri Krishna Janmashtami HD Wallpaper

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन मौके पर भगवान कान्हा की मोहक छवि देखने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु आज के दिन पहुंचते हैं। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मथुरा कृष्णमय हो जात है। मंदिरों को खास तौर पर सजाया जाता है। ज्न्माष्टमी में स्त्री-पुरुष बारह बजे तक व्रत रखते हैं। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती है और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है।

हिन्दू धर्म में श्री कृष्ण जन्माष्टमी को अलग अलग जगहों पर विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे कृष्णाष्टमी, सातम आठम, गोकुलाष्टमी, अष्टमी रोहिणी, श्रीकृष्ण जयंती और जन्माष्टमी।

इस वर्ष Saturday 24 August सितम्बर को जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा। जानते हैं, कुछ महत्वपूर्ण उपाय जिससे हम प्रभु को प्रसन्न कर सकें, ताकि हमारी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकें।

ऐसे मनाएं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और ऐसे करें सरल पूजन:-

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, वृषभ राशि, भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र एवं वृष के चन्द्रमाकालीन अर्धरात्रि के समय हुआ था। ऋषियों के मतानुसार सप्तमी युक्त अष्टमी ही व्रत, पूजन आदि हेतु ग्रहण करनी चाहिए। वैष्णव संप्रदाय के अधिकांश लोग उदयकालिक नवमी युत श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को ग्रहण करते हैं।

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भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन बडे़ ही धूमधाम से मनाया जाता है। जगद्गुरु श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव नि:संदेह सम्पूर्ण विश्व के लिए आनंद-मंगल का संदेश देता है।

इस दिन व्रत करनेवाले को चाहिए कि उपवास के पहले दिन कम भोजन करें। रात्रि में ब्रह्मचर्य का पालन करें। व्रत के दिन स्नानादि नित्यकर्म करके सूर्यादि सभी देव दिशाओं को नमस्कार करके पूर्व या उत्तर मुख बैठें। भगवान श्रीकृष्‍ण को वैजयंती के पुष्प अधिक प्रिय है, अतः जहां तक बन पडे़ वैजयंती के पुष्प अर्पित करें और पंचगंध लेकर व्रत का संकल्प करें।

ऐसी हो बाल कृष्ण की मूर्ति

उस पर ही सोना, चांदी, ताँबा, पीतल, मणि, वृक्ष, मिट्टी या चित्ररूप की मूर्ति स्थापित करें। मूर्ति में प्रसूत श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती हुई देवकी हों और लक्ष्मीजी उनके चरण स्पर्श किए हुए हों- ऐसा भाव प्रकट रहे।

कृष्णजी की मूर्ति को गंगा जल से स्नान कराएं। फिर दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, केसर के घोल से स्नान कराकर फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं। फिर सुन्दर वस्त्र पहनाएं। इस वर्ष जन्म कराने का मुहूर्त रात्रि में 10:44 से 12:40 के मध्य है। रात्रि बारह बजे भोग लगाकर पूजन करें व फिर श्रीकृष्णजी की आरती उतारें।

उसके बाद भक्तजन प्रसाद ग्रहण करें। व्रती दूसरे दिन नवमी में व्रत का पारणा करें।

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क्या है मोहरात्रि ?

श्रीकृष्ण-जन्माष्टमी की रात्रि को मोहरात्रि कहा गया है। इस रात में योगेश्वर श्रीकृष्ण का ध्यान, नाम अथवा मंत्र जपते हुए जगने से संसार की मोह-माया से आसक्तिहटती है। जन्माष्टमी का व्रत व्रतराज है। इसके सविधि पालन से आज आप अनेक व्रतों से प्राप्त होने वाली महान पुण्यराशिप्राप्त कर लेंगे।

आगे पढ़ें कैसे करें भगवान श्री कृष्ण को प्रसन्न…..

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