भगवान शिवजी का एक ऐसा मंदिर!! वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाये जिसका रहस्य!!

ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर को बनाने में लगभग 18 वर्ष का समय लगा था… 

लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इस मंदिर को आज की तकनीक से 18 साल तक बनाना असंभव है। सबसे बड़ी अजीब बात है इस मंदिर की यह है कि इस मंदिर को नीचे से ऊपर की ओर नहीं बल्कि इसका निर्माण ऊपर से नीचे की ओर किया गया है। इसके निर्माण के क्रम में अनुमानत: ४० हज़ार टन भार के पत्थारों को चट्टान से हटाया गया। इसके निर्माण के लिये पहले खंड अलग किया गया और फिर इस पर्वत खंड को भीतर बाहर से काट-काट कर 90 फुट ऊँचा मंदिर गढ़ा गया है। मंदिर भीतर बाहर चारों ओर मूर्ति-अलंकरणों से भरा हुआ है। इस मंदिर के आँगन के तीन ओर कोठरियों की पाँत थी जो एक सेतु द्वारा मंदिर के ऊपरी खंड से संयुक्त थी। अब यह सेतु गिर गया है। सामने खुले मंडप में नन्दी है और उसके दोनों ओर विशालकाय हाथी तथा स्तंभ बने हैं। यह कृति भारतीय वास्तु-शिल्पियों के कौशल का अद्भुत नमूना है।

यदि इस मंदिर को हम आज की टेक्निक से 18 साल तक बनाने की कोशिश करें तो अभी हम नहीं बना सकते। इस मंदिर को बनाने के लिए सिर्फ खुदाई ही नहीं बल्कि हल्के औजारों का भी इस्तेमाल किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसे 200 साल से कम समय में बनाना उस समय पर असंभव था।

अगले पेज पर पढ़ें किसने बनवाया था यह मंदिर…..

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