जानिए “अमरनाथ यात्रा” से जुड़े भगवान् शिव के कुछ अद्भुत रहस्य! जानेंगे तो होश उड़ जायेंगे!!

आषाढ़ पूर्णिमा से रक्षाबंधन तक होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा पर जाते हैं…

इस वर्ष अप्रैल महीने से श्री अमरनाथ यात्रा शुरू हो गई है। दरअसल, तमाम कठिनाइयों, बाधाओं और ख़तरों के बावजूद मॉनसून के समय दो महीने चलने वाली यह पवित्र यात्रा एक सुखद एहसास तो होती ही है। यही वजह है कि दिनोंदिन इसे लेकर उत्साह बढ़ता ही जा रहा है। जम्‍मू बेस कैंप से जब श्रद्धालुओं का जत्‍था निलता है तो ‘जय भालेनाथ’ ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के साथ साथ ‘वंदे मातरम्’ ‘जयहिंद’ और ‘भारत माता की जय’ के भी सुर निकलते हैं।

यही वजह है कि इस यात्रा पर आतंकवादियों की धमकियों और हमलों का भी कोई असर नहीं पड़ा। अमरनाथ की ख़ासियत पवित्र गुफा में बर्फ़ से नैसर्गिक शिवलिंग का बनना है। प्राकृतिक हिम से बनने के कारण ही इसे स्वयंभू ‘हिमानी शिवलिंग’ या ‘बर्फ़ानी बाबा’ भी कहा जाता है। गुफा में ऊपर से बर्फ के पानी की बूंदें टपकती रहती हैं। यहीं पर ऐसी जगह है, जहां टपकने वाली हिम बूंदों से क़रीब दस फ़िट ऊंचा शिवलिंग बनता है।

चंद्रमा के घटने-बढ़ने के साथ-साथ बर्फ़ के लिंग का आकार भी घटता-बढ़ता रहता है। सावन की पूर्णिमा को यह पूर्ण आकार में हो जाता है और अमावस्या तक धीरे-धीरे छोटा हो जाता है। हैरान करने वाली बात है कि शिवलिंग ठोस बर्फ़ का होता है, जबकि आसपास आमतौर पर कच्ची और भुरभुरी बर्फ़ ही होती है।

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