जानिए भगवान शिव ने कहां और क्यों काट दिया था गणेशजी का सिर!!

भगवान शिव ने यहां काटा था गणेश जी का सिर

हिन्दू धर्म में 33 करोड़ देवी-देवताओं का जिक्र मिलता है, हालांकि ये संख्या हमेशा से ही विवादास्पद रही है लेकिन सामान्य जन की बात करें तो वह यही जानता है कि हिन्दू धर्म और 33 करोड़ संख्या का संबंध अवश्य मौजूद है।

भले ही देवी-देवताओं की संस्ख्या बहुत ज्यादा हो लेकिन सच यही है कि सभी को एक अलग और विशिष्ट स्थान प्रदान किया गया है। जैसे देवी लक्ष्मी को धन की देवी माना गया है, भगवान शिव को तंत्र का देवता, भगवान कृष्ण का संबंध उल्लास से है तो देवी सरस्वती को विद्या की देवी कहा गया है।

ऐसे ही भगवान गणेश को शुभ और लाभ का देवता माना गया है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना गया है, किसी भी कार्य से पहले इनकी पूजा करना इसलिए अवश्यक माना जाता है क्योंकि ऐसा करने से उस कार्य में कोई भी विघ्न बाधा नहीं आती।

तस्वीरों और कहानियों में गणेश जी को हाथी के मुख और मनुष्य के शरीर के साथ दर्शाया गया है। जिनका जन्म उनकी माता पार्वती के शरीर की मैल से हुआ है। कहा जाता है कि एक बार भगवान शिव ने क्रोध में आकर गणेश की का सिर काट डाला था और माता पार्वती के कहने पर उन्हें हाथी का सिर लगा दिया था।

मगर, क्या आप जानते हैं कि ऐसा करने की स्थिति क्यों बनी थी। वह क्या श्राप था, जिसकी वजह से भोलेनाथ को भी पीड़ा उठानी पड़ी। आज हम आपको इसी रहस्य के बारे में बताएंगे।

अगले पेज पर पढ़ें आखिर क्यों काटना पड़ा था गणेशजी का सिर..

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