जानिए हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार सूर्यास्त के बाद क्यों नहीं करते और क्यों महिलाएं इसमें शामिल नहीं होती ?!!

इस दुनिया में हिंदू धर्म केवल एक ऐसा धर्म है जिसमें न जाने कितने रीति-रिवाज और परंपराएं है। हिंदू धर्म में व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु तक सोलह संस्कार माने जाते है। और जो सबसे आखिरी संस्कार होता है वह होता है सोलहवां संस्कार।

पूर्ण जानकारी, आखिर सूर्यास्त के बाद क्यों नहीं होता दाह संस्कार:-

गरुड़ पुराण में माना जाता है कि किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार करके 13 दिनों की छूत के बाद फिर से घर की शुद्धिकरण किया जाता है। इसी तरह इस पुराण में अंतिम संस्कार से संबंधित कई बातें बताई गई है। जब हम अंतिम संस्कार के लिए जाते है तो देखते है कि आखिर कभी भी सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार क्यों नहीं होता? इतना ही नहीं छेद वाले मटकी में जलभर परिक्रमा क्यों की जाती है? यह हमारे दिमाग में जरुर आता है, लेकिन हम यह बात जानते नहीं है कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है। इस बारे में गरुड़ पुराण में विस्तार से बताया गया है।

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इस पुराण के अनुसार माना जाता है कि सूर्यास्त के बाद कभी भी दाह संस्कार नहीं किया जाता। अगर किसा कि मृत्यु रात को हुई है तो उसका दाह संस्कार दूसरे दिन किया जाता है। इस बारें में माना जाता है कि सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार करने से मृतक व्यक्ति की आत्मा को परलोक में कष्ट भोगना पड़ता है और अगले जन्म में उसके किसी अंग में दोष हो सकता है। इस कारण सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार नहीं किया जाता है।

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