जानिए हिन्दू धर्म में होली का महत्व, क्यों मनाते हैं होली? होली का इतिहास और पूजन विधि!!

इस वर्ष होली 12 मार्च और दुलेंडी 13 मार्च की है!!

‘रंगों के त्यौहार’ के तौर पर मशहूर होली फाल्गुन महीने में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। तेज संगीत और ढोल के बीच एक दूसरे पर रंग और पानी फेंका जाता है। भारत के अन्य त्यौहारों की तरह होली भी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। प्राचीन पौराणिक कथा के अनुसार होली से हिरण्यकश्यप की कहानी जुड़ी है।

उत्साह, उमंग और उल्लास के साथ भाईचारे के रंग बिखेरने के लिए सभी बेताब हैं। बुराई पर अच्छाई की जीत के त्योहार जगह-जगह होलिका का दहन होगा और रंग गुलाल उड़ाकर खुशियां बांटी जाएंगी। हर गली-मोहल्ला रंगों के त्योहार में रमा रहेगा। धार्मिक एवं सामाजिक एकता का पर्व होली के होलिका दहन के लिए हर चौराहे व गली-मोहल्ले में गूलरी, कंडों व लकड़ियों से बड़ी-बड़ी होली सजाई जाती हैं। वहीं बाजारों में भी होली की खूब रौनक दिखाई पड़ती है।

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