एक महान हिन्दू योद्धा जिसने सनातन धर्म की रक्षा हेतु 40 युद्ध कर अरबों को चटाई थी धूल!! सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार!!

जानिए चक्रवर्ती सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार के बारे में… 

वैसे तो भारत में हमारे महान हिन्दू राजा योद्धाओं को भुला दिया गया और इतिहास में ऐसे महान योद्धाओं का नाम तक नहीं है पर आज हम आपको बताएँगे सम्राट मिहिरभोज के बारे में जो मौर्या वंश के राजा (चंद्रगुप्त, सम्राट अशोक) से भी महान थे, और उनके शासन काल से ही भारत सोने की चिड़िया कहलाया था। सम्राट मिहिरभोज एक ऐसे महान योद्धा थे जो अरबों का सबसे बडा दुश्मन थे जिसने लगभग 40 युद्ध कर अरबों को भारत से पलायन करने पर मजबूर कर दिया एवं सनातन धर्म की रक्षा की। 

सम्राट मिहिरभोज का जन्म विक्रम संवत 873 (816 ईस्वी) को हुआ था। सम्राट को कई नाम से जाना जाता है जैसे भोजराज, भोजदेव मिहिर, आदिवराह एवं प्रभास। भोजदेव मिहिर का राज्याभिषेक विक्रम संवत 893 यानी 18 अक्टूबर दिन बुधवार 836 ईस्वी में 20 वर्ष की आयु में हुआ था। और इसी दिन 18 अक्टूबर को ही हर वर्ष भारत में जयंती मनाई जाती है। इनके दादा का नाम नागभट्ट द्वितीय था उनका स्वर्गवास विक्रम संवत 890 (833 ईस्वी) भादो मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को हुआ। इनके पिता का नाम रामभद्र और माता का नाम अप्पादेवी था।

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——– >जानिए कैसा था उनका  साम्राज्य < ——–

सम्राट मिहिरभोज के साम्राज्य का विस्तार आज के मुल्तान से पश्चिम बंगाल और कश्मीर से उत्तर महाराष्ट्र तक था। राजा मिहिरभोज गुणी बलवान, न्यायप्रिय, सनातन धर्म रक्षक, प्रजा हितैषी एवं राष्ट्र रक्षक थे। सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार शिव शक्ति के उपासक थे। और उन्होंने मलेच्छों (अरब, मुगल, कुषाण, हूण) से पृथ्वी की रक्षा की थी। उन्हें वराह यानी भगवान विष्णु का अवतार भी बताया गया है। उनके द्वारा चलाये गये सिक्कों पर वराह की आकृति बनी हुई है।

अरब यात्री सुलेमान ने अपनी पुस्तक सिलसिला – उत – तारिका 851 ईस्वी में लिखी गयी। वह लिखता है की सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार (परिहार) के पास उंटो, घोडों व हाथियों की बडी विशाल एवं सर्वश्रेष्ठ सेना है। उनके राज्य में व्यापार सोने व चांदी के सिक्कों से होता है। उनके राज्य में सोने व चांदी की खाने भी है। इनके राज्य में चोरों डाकुओं का भय नही है। भारत वर्ष में मिहिरभोज प्रतिहार से बडा इस्लाम का अन्य कोई शत्रु नहीं है। मिहिरभोज के राज्य की सीमाएं दक्षिण के राष्ट्रकूटों के राज्य , पूर्व में बंगाल के शासक पालवंश और पश्चिम में मुल्तान के मुस्लिम शासकों से मिली हुई है।

अगले पेज पर जानिए उनकी सेना व् शासन काल के बारे में…..

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