जानिए ऐसे 300 महान हिन्दू योद्धाओं के बारे में जिन्होंने मात दी थी 10000 की मुगल सेना को!!

यही नहीं, स्वयं शिवाजी ने भी बाजी प्रभु के अभूतपूर्व उत्साह और सामरिक सूज बूझ को देखते हुए उन्हें अपनी सेना के दक्षिणी कमान को सौंपा जो कि आधुनिक कोल्हापुर के इर्द गिर्द उपस्थित था। बाजी प्रभु ने आदिलशाही नमक राजा के सेनापति अफज़ल खान को शिकस्त देने में एक अत्यंत ही अहम भूमिका अदा करी थी। हुआ कुछ यूँ की छत्रपति शिवाजी अफज़ल खान से अपने होने वाले द्वंद्व युद्ध के अभ्यास के लिए एक अति बलवान और अफज़ल जितने ही लम्बे चौड़े प्रतिद्वंदी को ढून्ढ रहे थे और यहीं पर बाजी प्रभु अपने साथ, सूरमा मराठा योद्धाओ की एक खेप लेकर आये, जिनमें विसजी मुरामबाक भी था जो अपनी कद काठी में अफज़ल खान जितना ही विशालकाय था।

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बस फिर क्या था, शिवाजी और बाजी प्रभु के नेतृत्व में मराठा सेनाओ ने अपनी कूटनीतिक और सामरिक चातुर्य से अफज़ल खान को मृत्यु और इस प्रबल जोड़ी ने आदिल शाह की अति विशाल सेनाओ तक के नाक में दम कर दिया। वस्तुतः, मराठा सेनाएं अपनी छापामार और घात लगाकर वार करने की क्षमता के कारण युद्धभूमि में इस्लामी हमलावरों के खिलाफ बेहद ही सफल रहे। उन दिनों शिवाजी ने अपनी सेना को पन्हाला किले के इर्द गिर्द इकठ्ठा कर लिया था। आदिल शाह को किसी तरह खबर मिल गई, उसने तुरंत अपनी एक विशाल सेना के द्वारा पन्हाला किले के समीप एक तीव्र हमला बोल दिया। हमला इतना भीषण था की मराठा सेनाओ को भारी नुकसानों का सामना करना पड़ा। वहां से निकालकर बचना शिवाजी के लिए अति महत्वपूर्ण हो गया था।

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