जानिए क्यों नहीं करने चाहिए भगवान श्री कृष्ण की पीठ के दर्शन

सनातन धर्म के वैदिक व पौराणिक शास्त्रों में पूजा-पाठ से संबन्धित अनेक निर्देश दिए हुए हैं । नित्य कर्म के संदर्भ में इशौप्निषद जैसे कुछ शास्त्रों में दैनिक कर्म से लेकर पूजन प्रणाली और देव दर्शन तक निर्देश दिए हुए हैं । शास्त्रों ने कुछ निर्देश देवस्थान जाने को लेकर भी बनाए गए हैं । कुछ निर्देश सामान्य हैं जैसे स्नान करके ही मंदिर जाना, साफसुथरे कपड़े पहन कर ही मंदिर जाना, तथा सदैव शुद्ध होकर ही देवस्थान जाना व पवित्र स्थिति में ही देवदर्शन करना इत्यादि।
शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि श्रीभगवान के दर्शन मात्र से ही जन्म-जानमंतार के पाप धुल जाते हैं । इसी कारण श्रीभगवान के दर्शन पाने हेतु कई प्रकार के अनुष्ठान और जतन किए जाते हैं । भक्तगण तीर्थों, देवालयों, धार्मिक स्थलों व मंदिरों में देवी-देवताओं के दर्शन हेतु जाते हैं । मान्यतानुसार सर्व देवी-देवताओं की मूर्तियों के दर्शन मात्र से पुण्य ही प्राप्त होता है परंतु ऐसा एक अपवाद शास्त्रों में उल्लेखित मिलता है । मान्यतानुसार भगवान श्रीकृष्ण के पीठ के दर्शन करना शास्त्रों में वर्जित माना गया है ।

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