जानिए आखिर कैसे हुआ था सृष्टि का विस्तार ? और अर्धनारीश्वर शिव का रहस्य ?!!

सृष्टि के प्रारम्भ में जब ब्रम्हा जी द्वारा रचि गयी मानसिक सृष्टि विस्तार न प् सकी तब ब्रम्हा जी को बहुत दुःख हुआ। उसी समय आकाशवाणी हुई – ब्रह्मा अब मैथुनी सृष्टि करो।’ आकाशवाणी सुनकर ब्रम्हा जी ने मैथुनी सृष्टि करने का निर्णय किया परन्तु उस समय तक नारियों की उत्पत्ति न होने के कारण वे अपने निर्णय में सफल नहीं हो सके। तब ब्रम्हा जी ने सोचा की परमेश्वर की कृपा के बिना मैथुनी सृष्टि नहीं हो सकती।

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अतः वे परमेशवर को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप करने लगे । बहुत दिनों तक ब्रम्हा जी आपने हृदय में प्रेमपूर्वक परमेश्वर शिव का धयान करते रहे । उनके तीव्र तप से प्रसन्न होकर – परमेश्वर शिव ने उन्हें अर्धनारीश्वर रूप में दर्शन दिया| देवादिदेव भगवान शिव के उस स्वरुप को देखकर ब्रम्हा जी अभिभूत हो उठे और उन्होंने दंड की भांति भूमि पर लेटकर उस अलोकिक विग्रह को प्रणाम किया।

और आगे पढ़ें महेश्वर शिव ने क्या कहा….

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