जानिये अध्यात्म में नवरत्नों की भूमिका और उनका महत्व!!

        “नवरत्नों की ऊर्जा और जीवन में उनका महत्व”

नवग्रहों का हमारे जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है नवग्रहों की स्थिति बच्चे के जन्म के समय निर्धारित हो जाती है जो समयानुसार बदलते रहते है एवं हमारे जीवन को प्रभावित करते है इन स्थितियों को नवरत्नों के माध्यम से सही किया जा सकता है नवग्रह एवं नवरत्नों में आपसी सम्बन्ध है ये एक -दूसरे के पूरक है। सामान्य भाषा में हम कह सकते है कि नवग्रहों में एक कंपनशक्ति होती है जिसमे सम्बंधित ऊर्जा प्रवाहित होती है। ये नवरत्न इन नवग्रहों की शक्तिओं को बढ़ाने का काम करते है।

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9 नवरत्न एवं उनका प्रभाव निम्न प्रकार है!!

1.) माणिक्य:-

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ये सूर्य से सम्बंधित ग्रह है ये सूर्य की कंपनशक्ति को बढ़ाने का काम करता है। सूर्य की कंपनशक्ति कम होने पर पेट के विकार(बीमारियां) हो जाती हैं। सूर्य की कंपनशक्ति को पूरा करने के लिए माणिक्य पहननेकी सलाह दी जाती है। गेहूं इस गृह से सम्बंधित अन्न है।

2.) नीलम:-

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नीलम अपने में अधिक कंपनशक्ति लिए होता है। इसलिए इसको धारण काने वाले को इसकी सही मात्रा का आंकलन करना आना चाहिए। यह शनि गृह से सम्बंधित रत्न है एवं इससे सम्बंधित फसल कला तिल है।

3.) पुखराज:-

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यह बृहस्पतिगृह से सम्बंधित रतन है। पुखराज को बृहस्पति गृह की कंपनशक्ति प्राप्त करने के लिए धारण किया जाता है। कला चना इससे सम्बंधित अन्न है।

4.) हीरा:-

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हीरा रत्न को धारण शुक्र ग्रह वाले लोग करते है। इस रत्न को शुक्र ग्रह की कंपनशक्ति को पूरा करने के लिए धारण किया जाता है। यदि शुक्र सही जगह पर स्थित है तो ये मनुष्य को ऐश्वर्य, उच्च भाग्य प्रदान करता है। कहा जाता है कि इसे धारण करने से जननांग सम्बंधित परेशानियां दूर हो जाती है एवं गृहस्थ जीवन सुखमय हो जाता है।

5.) मूंगा:-

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यह रत्न मंगल गृह की स्थिति को ठीक करने के लिए धारण किया जाता है। यह राजनितिक मामलों, आत्मशक्ति को बढ़ाने के लिए, प्रशाशनिक क्षमता बढ़ाने के लिए धारण किया जाता है। मूंगे को सोने या ताम्बे में धारण किया जाता है इससे सम्बंधित अन्न साबुत अरहर है।

6.) पन्ना:-

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पन्ना बुध गृह का रत्न है। यह हल्के हरे रंग का रत्न होता है इसे धारण करने से स्वास्थय लाभ , घर में ख़ुशी आती है , गर्भवती इस्त्री के धारण करने से प्रसव पीड़ा कम होती है , मानसिक अशांति , रक्त संचार में सुचारुता आती है। इसकी कम्पन शक्ति की कमी होने पर ह्रदय रोग होने की भी आशंका रहती है। इससे सम्बंधित अन्न साबुत मूंग है।

7.) लहसुनिया:-

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यह केतु गृह से सम्बंधित गृह है। केतु की कंपनशक्ति को पूरा करने के लिए इसे धारण किया जाता है। इसे धारण करने से सुख-समृद्धि,बहादुरी एवं बुरी आत्माओं से मुक्ति मिल जाती है। कुल्थी दाना इससे सम्बंधित धन्य है।

8.) गोमेद:-

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यह राहु गृह का रतन है। गोमेद धारण करके कंपनशक्ति को पूरा किया जाता है। राहु की स्थिति ठीक न होने पर यह मानसिक विकार एवं मष्तिष्क में भ्रम उत्पन्न करता है , गोमेद इससे आराम प्रदान करता है भ्रम दूर करता है , जीवन में स्थिरता एवं सकारातमक ऊर्जा प्रदान करता है। इससे सम्बंधित धान्य उड़द है।

9.) मोती:-

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यह चन्द्रमा का रत्न है। यह मन- मष्तिष्क को स्थिरता प्रदान करता है,धारक की स्मरण शक्ति को बढ़ाता है। ज्योतिषानुसार सोमवार को इसे धारण करना चाहिए। इसका धान्य धान है।

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