जानिये क्या है गायत्री मंत्र के उच्चारण से होने वाले शारीरिक लाभ!!

कहते हैं कि यदि आप संस्कृत भाषा में अलग-अलग मंत्रों का उच्चारण करते हैं तो आपका तन और मन स्वस्थ रहता है, और कहीं आप उच्चारित किए जाने वाले मंत्रों का अर्थ भी जानते हों तो फिर सोने पर सुहागा संस्कृत मंत्रों का सूची में सबसे ऊपर आता है गायत्री मंत्र गायत्री महामंत्र वेदों का एक महत्त्वपूर्ण मंत्र है जिसकी महत्ता ॐ के लगभग बराबर मानी जाती है। यह यजुर्वेद के मंत्र ॐ भूर्भुवः स्वः और ऋग्वेद के छंद 3.62.10 के मेल से बना है। इस मंत्र में सवित्र देव की उपासना है इसलिए इसे सावित्री भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र के उच्चारण और इसे समझने से ईश्वर की प्राप्ति होती है।

Gayatri_Mantra.tifगायत्री उपासना कभी भी, किसी भी स्थिति में की जा सकती है। हर स्थिति में यह लाभदायी है, परन्तु विधिपूर्वक भावना से जुड़े न्यूनतम कर्मकाण्डों के साथ की गयी उपासना अति फलदायी मानी गयी है। तीन माला गायत्री मंत्र का जप आवश्यक माना गया है। शौच-स्नान से निवृत्त होकर नियत स्थान, नियत समय पर, सुखासन में बैठकर नित्य गायत्री उपासना की जानी चाहिए।

गायत्री मंत्र के उच्चारण से होने वाले शारीरिक लाभ :-

1. मंत्र के उच्चारण के दौरान आपको सिलसिलेवार व लंबे स्वाश लेने पड़ते हैं जो आपके स्वाश लेने की शक्ति को मजबूत करते हैं. इससे न सिर्फ़ आपका फेफड़ा मजबूत होता है बल्कि इस तरह से सांस लेने से आपका रक्त संचार भी बढ़िया हो जाता है।

2. गायत्री मंत्र की शुरुआत ओम शब्द से होती है. ओम शब्द का उच्चारण आपके ओंठ, जीभ, तालु, गले के पिछले हिस्से और खोपड़ी में कंपन पैदा करता है. ऐसा माना जाता है कि हार्मोनों के रिलीज की वजह से दिमाग शांत होता है. गायत्री मंत्र के अक्षर कुछ इस कदर बिठाए गए हैं कि उनका उच्चारण करने से दिल और दिमाग को ठंडक पहुंचती है।

yoga-classes3. मंत्र के उच्चारण के साथ ही शरीर के अलग-अलग हिस्से में होने वाली कंपन दिमाग व नसों में होने वाले रक्तसंचार को काबू में रखती है ये मंत्र उच्चारण दिमाग व शरीर में मौजूद नसों में बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद करते हैं।

4. गायत्री मंत्र के उच्चारण से दिमाग नियंत्रण में रहता है अंतर्राष्ट्रीय योगा जर्नल में एक अध्ययन के छपने के बाद इस बाद का खुलासा हुआ है कि यह मंत्र अवसाद से उबरने में सहायक होता है।

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5. जीभ, ओंठ, वोकल कॉर्ड, तालु और दिमाग पर इस मंत्र के उच्चारण और उससे निकलने वाले कंपन की वजह से हाइपोथैलमस ग्लैंड से हारमोन का स्त्राव होता है. इस हारमोन के स्त्राव की वजह से इंसान को ख़ुश रखने वाले हार्मोन शरीर से बाहर निकलते है ये हार्मोन इंसान में शारीरिक विकारों व व्याधियों से लड़ने की क्षमता को भी पुख्ता करते हैंगायत्री मंत्र के उच्चारण से शरीर के भीतर के चक्र या केंद्रों को भी राहत पहुंचती है।

6. गायत्री मंत्र के उच्चारण के दौरान लोग लंबी सांस लेते हैं और उन्हें थोड़ी देर तक रोक कर रखते हैं यह पूरी प्रक्रिया फेफड़े को मजबूत करती है और अस्थमा के मरीजों के लिए ख़ास सहायक होती है।

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