ऐसा गांव जिसकी रखवाली करते हैं खुद शनिदेव महाराज! जरूर जानिए!

महराज शनिदेव खुद करते है इस गांव की रखबाली, एक भी घर-दुकान में नहीं लगता ताला

शनिदेव, भगवान सूर्य और माता छाया के पुत्र हैं। शनि को न्याय का देवता कहा जाता है ऐसी मान्यता है कि शनिदेव लोगों को उनके कर्मों के अनुसार दंड देते हैं। पूरे भारत में शनि महाराज के दो प्रमुख निवास स्थान हैं जिनमें एक मथुरा के पास स्थित कोकिला वन है और दूसरा महाराष्ट्र के औरंगाबाद में स्थित शिंगणापुर धाम। इनमें शिंगणापुर का विशेष महत्व है। यहां पर शनि महाराज की कोई मूर्ति नहीं है बल्कि एक बड़ा सा काला पत्थर है जिसे शनि का विग्रह माना जाता है।

शनि के प्रकोप से मुक्ति पाने के लिए देश विदेश से लोग यहां आते हैं और शनि विग्रह की पूजा करके शनि के कुप्रभाव से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। माना जाता है कि यहां पर शनि महाराज का तैलाभिषेक करने वाले को शनि कभी कष्ट नहीं देते। इस धाम से जुडी कई रोचक कहानियां विघमान है, इतना ही नहीं मंदिर के गांव में आज भी लोगो के घरो पर ताले नहीं लगते है। और ना ही यंहा किसी तरह की चोरी होती है, लोगो की मान्यता है। कि चोर को स्वयं शनिदेव दण्डित करते है। तो आइये जानते है शनिदेव की महिमा विस्तार से।

शनि देव हैं, लेकिन मंदिर नहीं है….

महाराष्ट्र में एक छोटा सा गांव है, जो शिंगणापुर के नाम से जाना जाता है। जो शिर्डी जाते हैं और जिन्हें इस जगह के बारे में पता है, वे शनि शिंगणापुर के दर्शन के लिए जरूर जाते हैं। महाराष्ट्र में शिरडी के पास अहमदनगर स्थित इस मंदिर की ख्याति देश ही नहीं विदेशों में भी है। कई लोग तो इस स्थान को शनि देव का जन्म स्थान भी मानते हैं। ऐसा कहा जाता है कि यहां शनि देव हैं, लेकिन कोई मंदिर नहीं है। घर है परंतु दरवाजा नहीं और वृक्ष है लेकिन छाया नहीं है।

साथ ही मंदिर में कथित तौर पर कोई पुजारी भी नहीं है। ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त इस मंदिर के भीतर जाए वह केवल सामने ही देखता हुआ जाए। उसे पीछे से कोई भी आवाज लगाए तो मुड़कर देखना नहीं चाहिए। शनिदेव को माथा टेक कर सीधा-सीधा बाहर आ जाना चाहिए। यह जगह शनिदेव के मंदिर के लिए तो प्रसिद्ध है हीं, इसके साथ-साथ इसकी एक और खासियत सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। यहां आज भी किसी भी घरों में दरवाजे नहीं हैं।

अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसे में चोरी-चकारी खूब होती होगी! तो जवाब है…नहीं, यहां चोरी की घटनाएं नहीं होती हैं। माना जाता है कि जो भी व्यक्ति यहां चोरी करेगा उसे स्वयं शनि देव ही सजा दे देंगे। यहां के लोग अलमारी, लॉकर, सूटकेस आदि भी नहीं रखते हैं। यह अनोखी प्रथा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। इस स्थान पर शनि की विशेष कृपा है। शास्त्रों के अनुसार शिंगणापुर में ही शनिदेव का जन्म भी हुआ है।

शनिदेव जन्म पौराणिक कथा…

शनि के जन्म स्थान शिंगणापुर के संबंध में एक कहानी प्रचलित है। पुरातन काल में एक पंडित शिंगणापुर में पधारे। पंडित जी नेत्र विहीन थे। एक रात उनके स्वप्न में शनिदेव ने दर्शन दिया, और उनसे बोले शिंगणापुर में जमीन के अंदर मेरी प्रतिमा है, उसे आप बाहर निकालें। इस पर पंडित जी ने शनिदेव से अनुरोध किया कि उन्हें दिखाई नहीं देता है, ऐसे में बह मूर्ति को कैसे बाहर निकालेंगे। पंडित ने शनिदेव से कहा, कि उन्हें दिखाई नहीं देता, इसलिए इस काम को करने में असमर्थ हैं। मान्यताओं के अनुसार, फिर शनिदेव ने उन्हें आंखों की रोशनी लौटा दी।

पौराणिक कथा के अनुसार अगली सुबह जब वह जगे तो दृष्टि पाकर अत्यंत प्रसन्न हुए और शनिदेव द्वारा बताई जगह पर खुदाई की तो वहां शनि की प्रतिमा वाकई मौजूद थी। इसके बाद शनि की प्रतिमा को बाहर निकालकर शनिदेव की मूर्ति की स्थापना की गई। तभी से शिंगणापुर में इसी स्थान पर शनिदेव की प्रतिमा स्थापित है। कहते हैं उसी पंडित के वंशज शिंगणापुर में आज भी शनिदेव की पूजा आराधना करते और कराते हैं।

शनि के प्रकोप से मुक्ति पाने के लिए देश विदेश से लोग यहां आते हैं और शनि विग्रह की पूजा करके शनि के कुप्रभाव से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। माना जाता है कि यहां पर शनि महाराज का तैलाभिषेक करने वाले को शनि कभी कष्ट नहीं देते। शनि के अधिदेवता प्रजापति ब्रह्मा और प्रत्यधिदेवता यम हैं। इनका वर्ण इन्द्रनीलमणी के समान है। उनका वाहन गिद्ध है। अस्त्रों-शस्त्रों की बात करें तो उनके हाथों में धनुष-बाण, त्रिशूल आदि मौजूद होता है। यह मकर व कुम्भ राशि के स्वामी हैं।

SHARE

हिन्दू धर्म, ज्योतिष एवं स्वास्थ्य की लगातार अपडेट प्राप्त करने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें और ट्विटर पेज फॉलो करें!! और बने रहिये Omnamahashivaya.com के साथ!

Loading...
SHARE