मंगल दोष की चारित्रिक विशेषतायें, प्रभाव एवं इसके उपाय

मंगल ज्योतिष की दृष्टि से एक बहुत ही महत्वपूर्ण गृह है! इसकी स्थिति व्यक्ति का स्वभाव, उसके जीवन में धन की स्थिति तथा वैवाहिक जीवन का निर्धारण करता है! मंगल एक ऊष्ण पृकृति वाला गृह है! दूसरे गृहों के साथ मंगल की स्थिति भी बहुत महत्वपूर्ण है जैसे की मंगल के अच्छे प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में धन आता है परन्तु उसका आय- व्यय का निर्धारण शुक्र करता है! किसी भी व्यक्ति की जन्म कुंडली में १२ घर अथवा भाव होते हैं जिनमे से किसी भी घर में कोई गृह स्थान ग्रहण कर सकता है! जब व्यक्ति की लग्न कुंडली के पहले. दूसरे, चौथे, सातवे, आठवे और बारहवे भाव में मंगल होता है, तब व्यक्ति मंगल दोष से ग्रसित माना जाता है! मंगली दोष वैवाहिक जीवन के लिए अनिष्टकर माना जाता है परन्तु दूसरे गृहों का साथ इस बात का निर्धारण करता है की मंगल दोष कितना प्रभावी होगा ! कुछ उपायों से भी मंगल दोष समाप्त हो जाता है! सामान्यतः उत्तरभारतीय ज्योतिष मंगल दोष की गणना करते समय दूसरे घर जबकि दक्षिण भारतीय ज्योतिष पहले घर को मान्यता नहीं देते!

मंगल दोष की चारित्रिक विशेषतायें:-

मंगली व्यक्ति प्रायः ऊष्ण अथवा तेज स्वाभाव के एवं स्वाभिमानी होते हैं !
ये व्यक्ति ऊर्जा से भरपूर होते हैं ! सही प्रकार से इस ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाए तो यह सृजनात्मकता उत्पन्न करता है !
मंगल दोष धन, स्वास्थ्य एवं वैवाहिक स्थिति प्रभावित करता है !
यदि दो मंगली व्यक्तियों का विवाह करा दिया जाए तो दोनों के ही मंगल दोष के प्रभाव समाप्त हो जाते है!

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विभिन्न भावों में मंगल के प्रभाव:-

प्रथम भाव में मंगलइसके प्रभाव से पति- पत्नी में विरोधाभास, मानसिक तनाव तथा अस्वस्थता उत्त्पन्न होती है!

द्वितीय भाव में मंगल:-

द्वितीय भाव में मंगल पारिवारिक कष्ट उत्पन्न करता है तथा व्यक्ति के परिवार एवं रिश्तेदोरों से विरोधाभास उत्पन्न होने लगते हैं!

चतुर्थ भाव में मंगल:-

चतुर्थ भाव में मंगल होने पर व्यक्ति को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है अथवा नौकरी में अस्थायित्व आ सकता है!

सातवे भाव में मंगल:-

सातवे भाव में मंगल व्यक्ति को चिड़चिड़ा बनाता है! यह व्यक्ति के चरित्र का भी निर्धारण करता है! इसमें व्यक्ति के विवाहेत्तर सम्बन्ध बनने की भी संभावना रहती है जोकि पति पत्नी में अलगाव का कारण बन सकता है!

आठवे भाव में मंगल:-

आठवे भाव में मंगल से व्यक्ति को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां, मानसिक पीड़ा होती है! जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है!

बाहरवें भाव में मंगल:-

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बाहरवें भाव में मंगल होने से व्यक्ति के बहुत से शत्रु उत्त्पन्न हो सकते हैं! स्वास्थ्य एवं धन सम्बंधित कष्ट भी हो सकता है!

विवाह पर प्रभाव: मंगल दोष दूर करने उपाय:- दो मंगली व्यक्तियों के बीच विवाह

कन्या के मंगली होने पर विवाह से पूर्व उसका विवाह पीपल, केले का वृक्ष अथवा कुम्भ से करा कर दोष मुक्त किया जा सकता है!
मांगलिक दोष युक्त कुण्डली का सबसे ज्यादा प्रभाव विवाह सम्बंन्ध इत्यादि पर पड़ता है। मांगलिक दोष होने पर :
• विवाह सम्बंन्ध तय नही हो पाना
• विवाह सम्बन्ध तय होकर छूट जाना
• अधिक उम्र गुजरने पर भी विवाह न होना
• विवाह के समय विघ्न आना
• विवाह पश्चात जीवन साथी से विवाद होना इत्यादि बातो पर प्रभाव डालता है ।

यदि दो मंगली व्यक्तियों का विवाह कराया जाए तो दोनों के ही मंगल दोष के प्रभाव समाप्त हो जाते हैं!

विशेष- यह केवल कन्याओं के लिए है पुरुषों में दोष के निवारण के लिए केवल प्रथम उपाय ही किया जा सकता है!

३- २८ के पश्चात विवाह

मंगली व्यक्तियों को २८ वर्ष की आयु के पश्चात विवाह करना चाहिए क्योंकि ऐसा माना जाता है कि आयु बढ़ने के साथ साथ मंगल दोष का प्रभाव कम हो जाता है!

४- व्रत

मंगलवार को हनुमान जी का व्रत रखने से भी मंगल गृह की कुदृष्टि शांत होती है!

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५- मंत्रोच्चारण

मंगलवार को हनुमानचालीसा पढ़ने से भी मंगलदोष का प्रभाव कम किया जा सकता है!
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