सवालों के कठघरे में खड़े हुए “दि हिन्दू” अंग्रेजी अख़बार और कुछ कांग्रेसी चाटुकार पत्रकार!!

जो सैनिक 8 जनवरी को शहीद हुए और उनका गला काटा गया, उनकी शहादत और गला काटे जाने का बदला 16 महीने पहले ही 30 अगस्त 2011 को कैसे ले लिया गया था।? 

क्या भारतीय सेना ने अपने उन दो जवानों की संभावित मृत्यु और सिर काट लिए जाने की घटना की संभावना के आधार पर 16 महीने पहले ही बदला ले लिया था और 8 पाकिस्तानी फौजियों को मौत के घाट उतारकर उनमें से 3 के सिर काट लिए थे।?

यह कुछ ऐसे गम्भीर सवाल हैं जिनका उत्तर दि हिन्दू अखबार और “NDTV” सरीखे न्यूजचैनलों के साथ ही साथ कांग्रेस को भी देना होगा। 

कल सवेरे दक्षिण भारत के अंग्रेजी अखबार “दि हिन्दू” ने एक सनसनीखेज खबर छापी है। उसकी खबर के अनुसार भारतीय सेना के जांबाज़ कमांडों की एक टीम ने 30 अगस्त 2011 की रात LOC पर कर पाकिस्तान में घुसकर हमला किया था और 8 पाकिस्तानी फौजियों को मौत के घाट उतार दिया था। अख़बार के अनुसार भारतीय कमांडों की टीम अपने हमले में मारे गए उन 8 पाकिस्तानी फौजियों में से तीन के सिर काटकर अपने साथ ले आयी।

अख़बार के अनुसार भारतीय कमांडों की टीम ने तीन पाकिस्तानी फौजियों के सिर काटकर भारतीय सेना के उन 2 शहीद जवानों की मौत का बदला लिया था जिनके सिर पाकिस्तानी फौजी कुछ दिन पहले काटकर ले गए थे।

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“दि हिन्दू” में अत्यंत सुनियोजित और प्रायोजित तरीके से प्रकाशित हुई इस खबर के साथ ही न्यूजचैनलों ने, विशेषकर NDTV ने इस खबर के बहाने जबरदस्त शोर मचाना प्रारम्भ कर दिया था कि हाल ही में 29 सितम्बर 2016 को भारतीय सेना के कमांडोज़ की टीम द्वारा की गयी सर्जिकल स्ट्राइक कोई पहली या उल्लेखनीय घटना नहीं है। इससे पहले की मनमोहन सरकार में भी सेना ऐसा करती रही है।

दरअसल इस पूरी खबर को फ़ैलाने के पीछे की मूल मंशा सेना की जयजयकार करना, या उसका मनोबल बढ़ाना नहीं था। इसके बजाय मोदी सरकार विशेषकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश की रक्षा से सम्बन्धित लिए गए एक अदम्य साहसी फैसले और उसको मिली अभूतपूर्व सफलता व सराहना की चमक पर धूल की परत बिछाना मात्र ही था। किन्तु अपने अंध “मोदी विरोध” के इस शातिर षड्यन्त्र के क्रियान्वयन में दि हिन्दू अखबार और कुछ न्यूजचैनलों,विशेषकर NDTV और “आजतक” से एक बड़ी भारी भूल हो गयी है जिसने उनकी इस खबर की धज्जियाँ बहुत बुरी तरह उड़ा दी हैं।

दरअसल “दि हिन्दू” अपनी खबर में LOC पर करके की गयी भारतीय सेना के कमांडोंज़ की कार्रवाई तथा उनके द्वारा तीन पाकिस्तानी फौजियों के सिर काटने का कारण भारतीय सेना के जिन 2 शहीद जवानों की मौत के प्रतिशोध को बता रहा है, उन 2 शहीद जवानों के सिर काटे जाने की घटना जुलाई या अगस्त 2011 में नहीं हुई थी।

यह घटना 8 जनवरी 2013 को घटित हुई थी। यानि कि दि हिन्दू द्वारा बताई जा रही तारीख के लगभग एक वर्ष चार माह बाद। हद तो यह है कि उस समय यह समाचार पूरे देश के मीडिया समेत स्वयम NDTV ने भी प्रसारित किया था।

अतः यही वह बिंदु है जो दि हिन्दू की खबर और उस खबर के सहारे हुडदंग कर रहे NDTV सरीखे न्यूजचैनलों को संगीन सवालों के कठघरे में खड़ा कर रहा है।  

बड़ी सामान्य सी बात है कि भारतीय सीमा में घुसकर पाकिस्तानी फौज ने जिन दो शहीद जवानों का सिर 8 जनवरी 2013 को काटा था उन जवानों की मौत तथा उनके सिर काटने की घटना का बदला लेने के लिए भारतीय सेना के कमांडोज़ ने लगभग 16 महीने पहले ही 30 अगस्त 2011 को LOC पार कर 8 पाकिस्तानी फौजियों को मार कर उनमें से तीन के सिर क्यों काट लिए थे।?

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क्या भारतीय सेना को यह पहले से मालूम था कि 16 महीने बाद पाकिस्तानी फौजी उसके दो जवानों का सिर काट कर ले जाएंगे।? 

क्या भारतीय सेना ने अपने उन दो जवानों की संभावित मृत्यु और सिर काट लिए जाने की घटना की संभावना के आधार पर 16 महीने पहले ही बदला ले लिया था और 8 पाकिस्तानी फौजियों को मौत के घाट उतारकर उनमें से 3 के सिर काट लिए थे।?

यह कुछ ऐसे गम्भीर सवाल हैं जिनका उत्तर दि हिन्दू अखबार और NDTV “आजतक” सरीखे न्यूजचैनलों के साथ ही साथ उस कांग्रेस को भी देना होगा जिसके नेताओं प्रवक्ताओं की फौज दि हिन्दू में प्रकाशित खबर के बाद से छाती ठोंक रही है, दावा कर रही है कि हमारी सरकार ने तो बदला ले ही लिया था लेकिन भाजपा की तरह हल्ला नहीं मचाया था।

अतः देश कांग्रेस से भी जानना चाह रहा है कि किसी घटना के घटने से 16 महीने पहले ही कांग्रेस सरकार ने उसका बदला क्यों और कैसे ले लिया था। 

अंत में यह उल्लेख भी आवश्यक है कि 8 जनवरी 2013 को पाकिस्तानी फौजियों द्वारा 2 भारतीय सैनिकों के सिर काटे जाने की घटना के बाद भी बदले में भारतीय सैनिकों द्वारा पाकिस्तानी फौजियों के सिर काटे जाने की अटकलें देश में जब गर्म हुई थीं तो 30 जनवरी 2013 को भारतीय सेना ने तथा 31 जनवरी 2013 को देश के तत्कालीन रक्षामंत्री एके एंटोनी ने ऐसी किसी भी अटकल को जोरदार शब्दों में पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए पूरी तरह खारिज़ कर दिया था।

ज्ञात रहे कि किसी देश की सेना व उसका रक्षामंत्री ऐसे अवसरों पर हां या ना कहने के बजाय चुप्पी तो साध लेते हैं किन्तु देश से झूठ नहीं बोलते हैं।

अगले पेज पर पढ़िए बीजेपी और कांग्रेस के सर्जिकल स्ट्राइक में अंतर….. 

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