चमत्कारिक:- 50 लाख लीटर पानी से भी नहीं भरता इस मंदिर में स्थित ये छोटा सा कुंड!!!

साल में दो बार हटता है इस कुंड का पत्थर:-

ग्रामीणों के अनुसार करीब 800 साल से गांव में यह परंपरा चल रही है। घड़े से पत्थर साल में दो बार हटाया जाता है। पहला शीतला सप्तमी पर और दूसरा ज्येष्ठ माह की पूनम पर। दोनों मौकों पर गांव की महिलाएं इसमें कलश भर-भरकर हज़ारो लीटर पानी डालती हैं, लेकिन घड़ा नहीं भरता है। फिर अंत में पुजारी प्रचलित मान्यता के तहत माता के चरणों से लगाकर दूध का भोग चढ़ाता है तो घड़ा पूरा भर जाता है। दूध का भोग लगाकर इसे बंद कर दिया जाता है। इन दोनों दिन गांव में मेला भी लगता है।

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वैज्ञानिकों को भी नही पता कहां जाता है पानी…

दिलचस्प है कि इस घड़े को लेकर वैज्ञानिक स्तर पर कई शोध हो चुके हैं, मगर भरने वाला पानी कहां जाता है, यह आज तक कोई पता नहीं लगा पाया है। 

घड़े में पानी डालने के लिए अपनी बारी का इंतजार करती लाइन में खड़ी महिलाएं..

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अगले पेज पर जानिए इस मंदिर की मान्यता के बारे में….

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