जानिये ॐ शब्द का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व!!

ॐ शब्द का वैज्ञानिक अर्थ और उसका धार्मिक महत्व

शब्द इस दुनिया में किसी ना किसी रूप में सभी मुख्य संस्कृतियों (हिन्दू ,मुस्लिम, सिख, ईसाई) का प्रमुख भाग है। जैसे हिन्दू धर्म में अपने सब मन्त्रों और भजनों में इसको शामिल किया गया है| ईसाई और यहूदी अपनी धार्मिक इच्छा प्रकट करने के लिएआमेनका प्रयोग करते हैं| मुस्लिम भाई इसकोआमीनकह कर याद करते हैं| सिख धर्म भीइक ओंकारअर्थातएक ओ३म के गुणगान करते हैं और बौध धर्म मेंओं मणिपद्मे हूंकहकर प्रयोग करते हैं.

हिन्दू धर्म में ऋषि मुनियों के अनुसार ओ३म् शब्द के तीन अक्षरों से भिन्न भिन्न अर्थ निकलते हैं। यह ओ३म् शब्द तीन अक्षरों से मिलकर बना है- अ, उ, म। प्रत्येक अक्षर ईश्वर के अलग अलग नामों को अपने आप में समेटे हुए है। हिन्दू धर्म के अनुसार चले तो ॐ शब्द मे ब्रह्मा-विष्णु-महेश तीनों के गुण समाये हुए हैं|

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ॐ का उच्चारण मात्र से ही शरीर के अलग अलग भागों मे कंपन होते है जैसे की ‘अ:- शरीर के निचले हिस्से (पेट के करीब) कंपन होता है। ‘उ– शरीर के मध्य भाग कंपन होता है (छाती के करीब) । ‘म– शरीर के ऊपरी भाग (मस्तिक) कंपन होता है।

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हिंदू धर्म के अनुसार सृष्टि की शुरुआत में जब ईश्वर ने ऋषियों के हृदय में वेद प्रकाशित किये तो हरेक शब्द से सम्बंधित उनके निश्चित अर्थ ऋषियों ने ध्यान अवस्था में प्राप्त किये। और ऋषिमुनि भी कोई वरदान पाने के लिए भी सालों तक ओम शब्द का जाप करते थे| हकीकत में प्रत्येक ध्वनि हमारे मन में कुछ भाव उत्पन्न करती है।

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ओ३म् इस ब्रह्माण्ड में उसी तरह भर हुआ है जैसे की आकाश। ओ३म् का उच्चारण करने से जो आनंद और शान्ति अनुभव होती है, वैसी शान्ति किसी और शब्द के उच्चारण से नहीं आती। यही कारण है कि सब जगह बहुत लोकप्रिय होने वाली आसन प्राणायाम की कक्षाओं में ओ३म के उच्चारण का बहुत महत्त्व है। बहुत मानसिक तनाव और अवसाद से ग्रसित लोगों पर कुछ ही दिनों में इसका जादू सा प्रभाव होता है। यही कारण है कि आजकल डॉक्टर आदि भी अपने मरीजों को आसन प्राणायाम की शिक्षा देते हैं

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ॐ शब्द कहने के कई शारीरिक, मानसिक, और आत्मिक लाभ हैं। यदि आपको अर्थ भी मालूम नहीं तो भी इसके उच्चारण मात्र से ही शारीरिक लाभ होता है। अगर आप यह सोचतें हैं कि ओ३म् किसी एक धर्म कि निशानी है, तोह यह आपकी गलत बात है और यह अच्छी बात नहीं|  ॐ शब्द कहने से ऐसी कोई बात नहीं है कि किसी भगवान् या अल्लाह का अनादर हो जाये। पुरे ब्रह्माण्ड में इसके उच्चारण करने से किसी को कोई दिक्कत नहीं और यह बोलने से लाभ ही होता है।

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अमेरिका के बोस्टन  कनेक्टिकट की एक महिला वैज्ञानिक ने ओ३म् पर बहुत वर्षो तक शोध किया और शोध का पूरा होने पर एक बहुत ही रोचक तथ्य सामने आया| ॐ शब्द के उच्चारण की आवृत्ति (frequency) और अपनी ही धुरी के चारों ओर घूमने वाली पृथ्वी के घूर्णन की आवृत्ति बिलकुल समान है। अमेरिका के एक FM रेडियो पर सुबह की आकाशवाणी ॐ शब्द के उच्चारण से ही होती है और १५ मिनट्स तक गायत्री मंत्र का उच्चारण होता है|

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अंग्रेजी में “omni”, जिसका अर्थ है अनंत और कभी ख़त्म न होने वाले तत्व  (जैसे omnipresent, omnipotent), भी ओ३म् शब्द से ही बना है। इस्सियह बात से यह सिद्ध है कि ओ३म् किसी एक इंसान, मजहब या सम्प्रदाय से न होकर बल्कि पूरी इंसानियत का शब्द है। जैसे कि हवा, पानी, सूर्य, ईश्वर, वेद आदि सब पूरी इंसानियत के लिए बने हैं न कि केवल किसी एक सम्प्रदाय धर्म और जाती के लिए।

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