आखिर क्या है! सत्य नारायण व्रत कथा का उद्देश्य, महत्व और इसके लाभ!

सत्यनारायण भगवान की कथा लोक में प्रचलित है। कुछ लोग मनौती पूरी होने पर, कुछ अन्य नियमित रूप से इस कथा का आयोजन करते हैं। सत्यनारायण व्रतकथाके दो भाग हैं, व्रत-पूजा एवं कथा। सत्यनारायण व्रतकथास्कंदपुराणके रेवाखंडसे संकलित की गई है।

कैसे की जाय सत्यनारायण भगवान की पूजा:-

सत्यनारायण व्रतकथापुस्तिका के प्रथम अध्याय में यह बताया गया है कि सत्यनारायण भगवान की पूजा कैसे की जाय। श्री सत्यनारायण का पूजन स्वयं करें। जो व्यक्ति सत्यनारायण की पूजा का संकल्प लेते हैं उन्हें दिन भर व्रत रखना चाहिए। पूजन स्थल को गाय के गोबर से पवित्र करके वहां एक अल्पना बनाएं और उस पर पूजा की चौकी रखें। इस चौकी के चारों पाये के पास केले का वृक्ष लगाएं। इस चौकी पर ठाकुर जी और श्री सत्यनारायण की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा करते समय सबसे पहले गणपति की पूजा करें फिर इन्द्रादि दशदिक्पाल की और क्रमश: पंच लोकपाल, सीता सहित राम, लक्ष्मण की, राधा कृष्ण की। इनकी पूजा के पश्चात ठाकुर जी व सत्यनारायण की पूजा करें। इसके बाद लक्ष्मी माता की और अंत में महादेव और ब्रह्मा जी की पूजा करें।

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पूजा के बाद सभी देवों की आरती करें और चरणामृत लेकर प्रसाद वितरण करें। पुरोहित जी को दक्षिणा एवं वस्त्र दे व भोजन कराएं। पुराहित जी के भोजन के पश्चात उनसे आशीर्वाद लेकर आप स्वयं भोजन करें।

सत्य नारायण व्रत कथा का उद्देश्य:-

सत्यनारायण व्रत का अनुष्ठान करके मनुष्य सभी दु:खों से मुक्त हो जाता है। कलिकाल में सत्य की पूजा विशेष रूप से फलदायीहोती है। सत्य के अनेक नाम हैं, यथा-सत्यनारायण, सत्यदेव। सनातन सत्यरूपीविष्णु भगवान कलियुग में अनेक रूप धारण करके लोगों को मनोवांछित फल देंगे।

सत्यनारायण कथा का महत्व:-

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सत्य नारायण भगवान् की पूजा का हिन्दू धर्म में बहुत अधिक महत्व होता हैं। किसी भी विशेष कार्य जैसे गृह प्रवेश, संतान उत्पत्ति, मुंडन, शादी के वक्त, जन्मदिन आदि शुभ कार्यो में सत्यनारायण की पूजा एवम कथा करायी अथवा स्वयं की जाती हैं। मनोकामना पूरी करने हेतु सत्यनारायण की कथा को कई लोग साल में कई बार विधि विधान से करवाते हैं। गरीबों एवं ब्राह्मणों को दान दक्षिणा देते हैं। कई लोग मानता के स्वरूप में भी सत्यनारायण की पूजा एवं कथा करते हैं और कई भगवान को धन्यवाद देने के लिए भी सत्यनारायण की पूजा करते हैं।

सत्यनारायण की पूजा एवं कथा दोनों का ही बहुत महत्व हैं कहते हैं सुनने मात्र से पूण्य की प्राप्ति होती हैं। सत्य को मनुष्य में जगाये रखने के लिए सत्यनारायण की पूजा का महत्व आध्यात्म में निकलता हैं। भगवान की भक्ति के कई रास्ते हैं। धार्मिक कर्म कांड अथवा मानव सेवा। पूजा पाठ में मन को लगा देने से चित्त शांत होता हैं। मन पर नियत्रण होता हैं।

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सत्यनारायण पूजा के लाभ:-

  • घर में शांति 
  • जीवन में खुशी
  • समृद्धि
  • बाधाओं को दूर करने के लिए
  • अप्रत्याशित अचानक मौत से बचने के लिए
  • नकारात्मकता समाशोधन

यह पूजा पूर्णिमा के दिन पर ही नहीं अन्य शुभ अवसर जैसे शादियों के समय में पर या उपलब्धियों के समय में भी की जाती है। आम तौर पर यह पूर्णिमा के दिन की शाम के समय के दौरान किया जाती है। पूजा के दिन प्रभु सत्यनारायण के भक्त प्रथानुसार उपवास रखते है।

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