आखिर खुल गया महाभारत के विमान का रहस्य….. गायब हुए ढूंढने वाले कमांडो!!!

रामायण और महाभारतकाल में विमान होते थे, ऐसा हमने अपने बड़ों से सुना है और हिन्दू धर्मग्रंथों में भी इसका वर्णन किया गया है। हाल ही में एक सनसनीखेज जानकारी सामने आई है। इसके मुताबिक अफगानिस्तान में एक 5000 साल पुराना विमान मिला है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि यह महाभारतकालीन हो सकता है।

5000 साल पुराना विमान गुफा में मिला:-

वायर्ड डॉट कॉम और यूएस एयरफोर्स की लीक इन्फॉर्मेशन के मुताबिक, साल 2012 में पांच हजार साल पुरानी फ्लाइंग मशीन का पता चला था। एक रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि प्राचीन भारत के पांच हजार वर्ष पुराने एक विमान को हाल ही में अफ‍गानिस्तान की एक गुफा में पाया गया है। इसे तलाशने में अमेरिकी नेवी सील के कमांडो कामयाब हुए हैं। लेकिन जिन 8 कमांडो ने इस विमान के पास जाने की कोशिश की उनका अब तक कुछ अता-पता नहीं चला है।

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विमान के ढूंढने वाले लापता या फिर मौत:-

कहा जा रहा है कि यह विमान रेगिस्तानी इलाके के एक ‘टाइम वेल’ में फंसा हुआ है। यह अफगानिस्तान की सबसे दुर्गम पर्वत श्रृंखला में कहीं दबा हुआ है। इसके कारण ही ये सुरक्षित बना हुआ है। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि इस विमान के पास जाने की चेष्टा करने वाला कोई भी व्यक्ति इसके प्रभाव के कारण गायब या अदृश्य हो जाता है।

माना जा रहा है कि यह 5000 साल पुरान विमान महाभारत काल का है और इसके आकार-प्रकार का विवरण महाभारत और अन्य प्राचीन हिन्दू ग्रंथों में किया गया है। पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक, विमान एक स्ट्रेंज एनर्जी से प्रोटेक्टेड रहता था। इसलिए जब सैनिकों ने इसे गुफा से निकालने की कोशिश की तो वह इसके ‘टाइम वेल’ के कारण सील कमांडो अचानक गायब हो गए या फिर मारे गए।

टाइम वेल विमान की प्रोटेक्टेड शील्ड है। यह इलेक्ट्रॉन मैग्नेटिक रेडिएशन ग्रैविटी फील्ड जैसा है।  पहली बार इसके बारे में ऋषि भारद्वाज ने अपनी ‘वैमानिकी शास्त्र थ्योरी’ में जिक्र किया था।

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विमान मिलने के बाद पश्चिमी देशों में हचलच:-

साल 2013 की गर्मियों में कई वेस्टर्न कंट्रीज के लीडर्स ने अफगानिस्तान का सीक्रेट टूर किया था।  इसमें ओबामा के साथ ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरन, पूर्व फ्रेंच प्रेसिडेंट निकोलस सरकोजी और जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल भी शामिल थीं।  निकोलस सरकोजी उस समय भारत में थे, लेकिन अचानक अफगानिस्तान जाना पड़ा था।

5000 साल पुराना विमान मिलने के बाद तमाम पश्चिमी देशों के नेताओं के बीच हलचल मच गई। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसमें काफी दिलचस्पी दिखाई है। खबरे तो यहां तक है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के राष्ट्राध्यक्षों के साथ मिलकर इस साइट का अतिगोपनीय दौरा भी कर चुके हैं। रशियन फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विज (एसवीआर) का कहना है कि यह महाभारतकालीन 5000 साल पुराना विमान है और जब इसका इंजन शुरू होता है तो इससे बहुत तेज रोशनी निकलती है। एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन को सौंप दी है।

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विमान का डायमीटर साढ़े पांच मीटर का, चार पहिए और हथियारों से लैस:-

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस विमान में चार मजबूत पहिए लगे हुए हैं और यह प्रज्जवलनशील हथियारों से सुसज्जित है। यह आग फेंकने वाली मिसाइलों से लैस था। इसमें एक अन्य डेडली वीपन ‘रिफ्लेक्टर’ का इस्तेमाल होता था। यह अपने टारगेट पर तेज लाइट फेंककर उस पर हमला करता था। इसके द्वारा अन्य घातक हथियारों का भी इस्तेमाल किया जाता है और जब इन्हें किसी लक्ष्य पर केन्द्रित कर प्रक्षेपित किया जाता है तो ये अपनी शक्ति के साथ लक्ष्य को भस्म कर देते हैं।

ऐसा माना जा रहा है कि यह प्रागैतिहासिक मिसाइलों से संबंधित विवरण है। अमेरिकी सेना के वैज्ञानिकों का भी कहना है कि जब सेना के कमांडो इसे निकालने का प्रयास कर रहे थे तभी इसका टाइम वेल सक्रिय हो गया और इसके सक्रिय होते ही आठ सील कमांडो गायब हो गए । वैज्ञानिकों का कहना है कि यह टाइम वेल सर्पाकार है और इसके सम्पर्क में आते ही सभी जीवित प्राणियों का अस्तित्व इस तरह समाप्त हो जाता है मानो कि वे मौके पर मौजूद ही नहीं रहे हों।

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संस्कृत भाषा में विमान केवल उड़ने वाला वाहन ही नहीं होता है वरन इसके कई अर्थ हो सकते हैं, यह किसी मंदिर या महल के आकार में भी हो सकता है।

रामायण में भी था पुष्पक विमान का उल्लेख:-

रामायण में भी पुष्पक विमान का उल्लेख मिलता है जिसमें बैठकर रावण सीता को हर ले गया था। हनुमान भी सीता की खोज में समुद्र पार लंका उड़ कर ही पहुंचे थे। रावण के पास पुष्पक विमान था जिसे उसने अपने भाई कुबेर से हथिया लिया था। राम-रावण युद्ध के बाद श्रीराम ने सीता, लक्ष्मण तथा अन्य लोगों के साथ सुदूर दक्षिण में स्थित लंका से कई हजार किमी दूर उत्तर भारत में अयोध्या तक की दूरी हवाई मार्ग से पुष्पक विमान द्वारा ही तय की थी। इन सभी उल्लेखों में मनुष्य द्वारा आकाश में उड़ने की बात इतनी बार बताई गई है, जिससे विश्वास होता है कि कई प्राचीन सभ्यताएं कोई ऐसी तकनीक का आविष्कार कर चुकी थीं जिनकी सहायता से वे आसानी से आकाश में उड़ सकती थीं।

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सबसे पहले ऋषि भारद्वाज ने लिखा था वैमानिकी शास्त्र:-

सबसे महत्वपूर्ण है चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में महर्षि भारद्वाज द्वारा लिखित ‘वैमानिक शास्त्र’ में एक उड़ने वाले यंत्र ‘विमान’ के 536 प्रकारों का वर्णन किया गया था तथा हवाई युद्ध के कई नियम व प्रकार बताए गए।

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वैमानिक शास्त्र में भारद्वाज मुनि ने विमान की परिभाषा, विमान का चालक, आकाश मार्ग, वैमानिकी के कपड़े, विमान के पुर्जे, तथा उन्हें बनाने हेतु विभिन्न धातुओं का वर्णन किया था। ये वर्णन आधुनिक युग में विमान निर्माण प्रकिया से काफी मिलता है।

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