आज भी प्रज्वलित है वह अग्नि!! जहाँ भगवान शिव और पार्वती ने लिए थे सात फेरे!!

यहाँ आज भी प्रज्जवलित हो रही है वह अग्नि..

उतराखंड में वैसे तो कई ऐसे हिंदू धार्मिक स्थल हैं जिनपर हर हिंदू आस्था रखता है लेकिन इन सब धार्मिक स्थलों में से एक ‘त्रियुगी नारायण मंदिर’ का अलग स्थान है। माना जाता है कि इसी स्थान पर सतयुग में भगवान् शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान् शिव और देवी पार्वती के विवाह के साक्षी भगवान् विष्णु बने थे इसलिये यहाँ पर उनका भी एक मंदिर है।

मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। फिर उनकी तपस्या से प्रसन्न हो कर शिवजी ने पार्वती जी से विवाह किया। ऐसा माना जाता है कि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के त्रिर्युगी नारायण गाँव में वे विवाह के बंधन में बंधे थे।

माना जाता है कि गांव में भगवान विष्‍णु और देवी लक्ष्मी का जो मंदिर है, यहीं पर शिव-पार्वती का विवाह हुआ था। इस मंदिर के परिसर में कई ऐसी चीजें है, जिन्हें शिव-पार्वती के विवाह से जोड़कर देखा जाता है।

उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में बसे ‘त्रियुगी नारायण मंदिर’ के दर्शन के लिये हर साल कई श्रद्धालु यहाँ आते हैं। इस मंदिर परिसर में एक कुंड स्थित है जिसके फेरे भगवान् शिव और माता पार्वती ने विवाह के दौरान लिये थे। इस हवन कुंड में आज तक भी अग्नि प्रज्वलित हो रही है।

अगले पेज पर पढ़ें किसने निभाई थी विवाह में माता पार्वती के भाई की भूमिका….

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