आज भी प्रज्वलित है वह अग्नि!! जहाँ भगवान शिव और पार्वती ने लिए थे सात फेरे!!

भगवान् विष्णु ने शिव-पार्वती के विवाह में माता पार्वती के भाई की भूमिका.. 

मंदिर में प्रसाद स्वरूप लकड़ियां चढ़ाई जाती हैं। भक्त इस हवन कुंड की राख को अपने घर ले जाते हैं। माना जाता है कि हवन कुंड की राख विवाहित जोड़ों के लिये शुभ होती है और उनके विवाहित जीवन को सुखमय बनाती है।

भगवान् शिव और पार्वती का विवाह भगवान् ब्रह्मा ने करवाया था। विवाह करवाने से पहले ब्रहम देव ने जिस कुंड में स्नान किया था उसे ब्रह्मकुंड कहा जाता है। लोग इस कुंड में स्नान करके भगवान् ब्रह्मा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ऊपर दी गई तस्वीर ब्रह्मकुंड की है।

भगवान् विष्णु ने शिव-पार्वती के विवाह में माता पार्वती के भाई की भूमिका निभाई थी। जिस कुंड में स्नान करके भगवान् विष्णु विवाह में शामिल हुए थे उसे विष्णु कुंड कहते हैं। ऊपर दिया गया कुंड विष्णुकुंड है।

भगवान् शिव और माता पार्वती के विवाह में देवी-देवताओं ने जिस कुंड में स्नान किया था उसे रूद्र कुंड कहा जाता है। ऊपर दी गई तस्वीर रूद्र कुंड की है।

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