आखिर कौन से हैं भगवान शंकर के प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंग!!

जानिए क्या है भगवान शंकर के १2 ज्योतिर्लिंग की महत्ता

कहते हैं भगवान शिव शंकर सबके कष्ट हरते हैं। शिव का नाम का जपने से ही सारे कष्टों का निवारण हो जाता है। देवों के देव महादेव की कृपा जिस पर हो जाये उसे किसी भी तरह का कष्ट कभी भी नहीं होता। ऐसे में शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन को पूरे जीवन के लिए अनंत दर्शन के रूप में माना जाता है। इन एकादश शिवा के ज्योतिर्लिंगों के सम्बन्ध में शिव पुराण में निम्नलिखित श्लोक दिया गया है, जिससे स्पष्ट पता चलता है कि भारत की धरती पर शिव की कितनी कृपा रही है। शिव के इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए लोग न जाने कहां-कहां से इन स्थानों पर आते हैं। इन सभी १2 ज्योतिर्लिंगों की अपनी धार्मिक निष्ठां एवं अलग अलग महत्व है।

                    सौराष्ट्रे सोमनाथं श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।

                    उज्जयिन्यां महाकालं ओंकारं ममलेश्वरम्।।

                    हिमालये केदारं डाकिन्यां भीमशंकरम्।

                    वाराणस्यां विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे।।

                    वैद्यनाथं चिताभूमौ नागेशं दारूकावने।

                    सेतुबन्धे रामेशं घुश्मेशं शिवालये।।

                    ऐतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः।

                    सप्तजन्मकृतम पापम् स्मरनिणां विनस्यति।।

कहा जाता है जो भी मनुष्य प्रतिदिन प्रातः काल उठकर इन ज्योतिर्लिंगों का नाम जपता है अर्थात उपर्युक्त श्लोकों को पढ़ता हुआ, शिवलिंगों का मन से ध्यान करता है, उसके सातों जन्म तक के पाप नष्ट हो जाते हैं। जिस कामना की पूर्ति के लिए मनुष्य नित्य इन नामों का पाठ करता है, शीघ्र ही उस फल की प्राप्ति हो जाती है। इन लिंगो के दर्शन मात्र से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है, यही भगवान शिव की विशेषता है।

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिवशंकर प्राणियों के कल्याण हेतु जगह-जगह तीर्थों में भ्रमण करते रहते हैं तथा लिंग के रूप में वहां निवास भी करते हैं। पृथ्वी पर स्थित सभी शिवलिंगों की गणना तो नहीं की जा सकती, किन्तु उनमें कुछ प्रमुख शिवलिंग हैं जो प्रमुख हैं। शिव पुराण के अनुसार प्रमुख द्वादश ज्योतिर्लिंग इस प्रकार हैं, जिनमें नाम श्रवण मात्र से मनुष्य का किया हुआ पाप दूर भाग जाता है।

1.) सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: गुजरात

पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मन्दिर गुजरात के (सौराष्ट्र) प्रांत के काठियावाड़ क्षेत्र के अन्तर्गत प्रभास में विराजमान हैं। इसी क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्णचन्द्र ने यदु वंश का संहार कराने के बाद अपनी नर लीला समाप्त कर ली थी।जरानामक व्याध (शिकारी) ने अपने बाणों से उनके चरणों (पैर) को भेद डाला था|

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2.) मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग: आन्ध्र प्रदेश

आन्ध्र प्रदेश के कृष्णा ज़िले में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल पर्वत पर श्रीमल्लिकार्जुन विराजमान हैं। इसे दक्षिण का कैलाश कहते हैं। महाभारत के अनुसार श्रीशैल पर्वत पर भगवान शिव का पूजन करने से अश्वमेध यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है। कुछ ग्रन्थों में तो यहाँ तक लिखा है कि श्रीशैल के शिखर के दर्शन मात्र करने से लोगों के सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं, उसे अनन्त सुखों की प्राप्ति होती है और आवागमन के चक्कर से मुक्त हो जाता है।

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3.) महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग: उज्जैन, मध्य प्रदेश

तृतीय ज्योतिर्लिंग महाकाल यामहाकालेश्वरके नाम से प्रसिद्ध है। यह स्थान मध्य प्रदेश के उज्जैन में है, जिसे प्राचीन साहित्य में अवन्तिका पुरी के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ पर भगवान महाकालेश्वर का भव्य ज्योतिर्लिंग विद्यमान है।

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4.) ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: उत्तरी भारत

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के साथ ही अमलेश्वर ज्योतिर्लिंग भी है। इन दोनों शिवलिंगों की गणना एक ही ज्योतिर्लिंग में की गई है। ओंकारेश्वर स्थान भी मालवा क्षेत्र में ही पड़ता है।

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5.) केदारनाथ ज्योतिर्लिंग: उत्तराखंड

यह ज्योतिर्लिंग हिमालय की चोटी पर विराजमान श्रीकेदारनाथजी का है। श्री केदारनाथ कोकेदारेश्वरभी कहा जाता है, जो केदार नामक शिखर पर विराजमान है। इस शिखर से पूरब दिशा में अलकनन्दा नदी के किनारे भगवान श्री बद्री विशाल का मन्दिर है। केदारनाथ दर्शन के सम्बन्ध में लिखा है कि जो कोई व्यक्ति बिना केदारनाथ भगवान का दर्शन किये यदि बद्रीनाथ क्षेत्र की यात्रा करता है, तो उसकी यात्रा निष्फल अर्थात व्यर्थ हो जाती है।

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6.) भीमशंकर ज्योतिर्लिंग: डाकिनी, महाराष्ट्र

इस ज्योतिर्लिंग का नामभीमशंकरहै, जो डाकिनी पर अवस्थित है। यह स्थान महाराष्ट्र में मुम्बई से पूरब तथा पूना से उत्तर की ओर स्थित है, जो भीमा नदी के किनारे सहयाद्रि पर्वत पर हैं। भीमा नदी भी इसी पर्वत से निकलती है। भारतवर्ष में प्रकट हुए भगवान शंकर के बारह ज्योतिर्लिंग में श्री भीमशंकर ज्योतिर्लिंग का छठा स्थान हैं।

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7.) विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग: काशी, उत्तर प्रदेश

सप्तम ज्योतिर्लिंग काशी में विराजमानविश्वनाथको सप्तम ज्योतिर्लिंग कहा गया है। कहते हैं, काशी तीनों लोकों में न्यारी नगरी है, जो भगवान शिव के त्रिशूल पर विराजती है। विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद के काशी नगर में अवस्थित है। इसे आनन्दवन, आनन्दकानन, अविमुक्त क्षेत्र तथा काशी आदि अनेक नामों से जाना जाता है।

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8.) त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग: नासिक, महाराष्ट्र

अष्टम ज्योतिर्लिंग को ‘त्र्यम्बक’ के नाम से भी जाना जाता है। यह नासिक ज़िले में पंचवटी से लगभग अठारह मील की दूरी पर है। यह मन्दिर ब्रह्मगिरि के पास गोदावरी नदी कें किनारे स्थित है। इसे त्र्यम्बक ज्योतिर्लिंग, त्र्यम्बकेश्वर शिव मन्दिर भी कहते है। यहाँ समीप में ही ब्रह्मगिरि नामक पर्वत से गोदावरी नदी निकलती है। जिस प्रकार उत्तर भारत में प्रवाहित होने वाली पवित्र नदी गंगा का विशेष आध्यात्मिक महत्त्व है, उसी प्रकार दक्षिण में प्रवाहित होने वाली इस पवित्र नदी गोदावरी का विशेष महत्त्व है

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9.) वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग: झारखण्ड

नवंम ज्योतिर्लिंग वैद्यनाथहैं। यह स्थान झारखण्ड प्रान्त के संथाल परगना में जसीडीह रेलवे स्टेशन के समीप में है। पुराणों में इस जगह को चिताभूमि कहा गया है। भगवान श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का मन्दिर जिस स्थान पर अवस्थित है, उसेवैद्यनाथधामकहा जाता है।

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10.) नागेश्वर ज्योतिर्लिंग: बड़ौदा, गुजरात

नागेश नामक ज्योतिर्लिंग जो गुजरात के बड़ौदा क्षेत्र में गोमती द्वारका के समीप है। इस स्थान को दारूकावन भी कहा जाता है। कुछ लोग दक्षिण हैदराबाद के औढ़ा ग्राम में स्थित शिवलिंग का नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मानते हैं, तो कोईकोई उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा ज़िले में स्थित जागेश्वर शिवलिंग को ज्योतिर्लिंग कहते हैं। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात प्रान्त के द्वारकापुरी से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है।

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11.) रामेश्वर ज्योतिर्लिंग: तमिलनाडु

दशम ज्योतिर्लिंगरामेश्वरहैं। रामेश्वरतीर्थ को ही सेतुबन्ध तीर्थ कहा जाता है। यह स्थान तमिलनाडु के रामनाथम जनपद में स्थित है। यहाँ समुद्र के किनारे भगवान रामेश्वरम का विशाल मन्दिर शोभित है। यह हिंदुओं के चार धामों में से एक धाम है। यह तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरम ज़िले में स्थित है। मन्नार की खाड़ी में स्थित द्वीप जहां भगवान् राम का लोकप्रसिद्ध विशाल मंदिर है।

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12.) घृश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग: महाराष्ट्र

एकादशवां ज्योतिर्लिंग घृश्मेश्वरहै। इन्हें कोईघृष्णेश्वरतो कोईघुसृणेश्वरके नाम से पुकारता हैं। यह स्थान महाराष्ट्र क्षेत्र के अन्तर्गत दौलताबाद से लगभग अठारह किलोमीटर दूरबेरूलठ गाँव के पास है। इस स्थान कोशिवालयभी कहा जाता है। घुश्मेश्वर को लोग घुसृणेश्वर और घृष्णेश्वर भी कहते हैं। घृष्णेश्वर से लगभग आठ किलोमीटर दूर दक्षिण में एक पहाड़ की चोटी पर दौलताबाद का क़िला मौजूद है।

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साभार: (न्यूज़ रूम पोस्ट से)……..

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